ताज़ा खबर
 

चौपालः ‘ईवीएम बनाम मतपत्र’, ‘तंबाकू से तौबा’ और ‘हिंदी का हाल’

अट्ठाईस मई को संपन्न उपचुनावों में कुछ जगह ईवीएम गर्मी के कारण खराब हुए। तुरंत ईवीएम-विरोधी वक्तव्यों और संपादकीय लेखों की बाढ़ आ गई। उधर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जिद के कारण पंचायत चुनाव मतपत्र से कराए गए थे।

Author May 31, 2018 4:58 AM
ईवीएम मशीन में तकनीकी गड़बड़ी को लेकर विरोध करते हुए कांग्रेस के कार्यकर्ता (Source Image: PTI)

ईवीएम बनाम मतपत्र

अट्ठाईस मई को संपन्न उपचुनावों में कुछ जगह ईवीएम गर्मी के कारण खराब हुए। तुरंत ईवीएम-विरोधी वक्तव्यों और संपादकीय लेखों की बाढ़ आ गई। उधर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जिद के कारण पंचायत चुनाव मतपत्र से कराए गए थे। वहां मतपत्र छीनने, कब्जा करने, बूथ छापने, यहां तक कि मतगणना के समय भी मतपत्र पर तृणमूल के पक्ष में मोहर लगा कर धांधली की कोशिशें सामने आर्इं। मतपत्र तालाबों-कुओं में फेंके हुए मिले, अधजली अवस्था में स्थान-स्थान पर पाए गए। इन सब घटनाओं के फोटो मौजूद हैं, प्रकाशित भी हुए हैं लेकिन इस सबके बारे में मीडिया अपेक्षया खामोश रहा है। मतलब यदि गड़बड़ प्रचारित करनी है तो केवल ईवीएम के बारे में, बैलट यानी मतपत्र संबंधी तमाम अपराध छुपाने का प्रयास ही होना है।

यहां गौरतलब है कि बैलट की मांग करने वाले दल वही हैं, जो बाहुबलियों-गुंडों-अपराधियों के पारंपरिक आश्रय-स्थल हैं, जो ईवीएम-पूर्व के काल में खूब बूथ लूटते थे, और मतदान केंद्र में घुस क र सैकड़ों-हजारों मतपत्र अपने प्रत्याशी के पक्ष में डालते थे। ममता का दल आज अपने पुराने प्रतिपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से भी ज्यादा आक्रामक बन चुका है और सारे चुनाव गुंडागर्दी के बल पर जीत रहा है। ईवीएम के कारण तृणमूल और अन्य ऐसे दल बूथ छाप नहीं सकते। इसलिए इन्हें इस मशीन से नफरत है।

आस्था गर्ग, बागपत रोड, मेरठ

तंबाकू से तौबा

हर वर्ष की तरह इस साल भी 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाएगा। तंबाकू सेवन के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत की थी। आज तंबाकू का नशा सचमुच एक नासूर बन रहा है। इसका नशा और नाश एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। नशा कोई भी क्यों न हो, हमेशा बर्बाद ही करता है। तंबाकू का सेवन करने वाला अपना स्वास्थ्य तो बर्बाद करता ही है, दूसरे लोगों के लिए भी खतरनाक सिद्ध होता है। तंबाकूपीने या खाने वाला जब खांसता या थूकता है तो कई खतरनाक रोगाणुओं के दूसरों तक पहुंचा देता है। तंबाकू का जो सेवन करता है वह अपने घर को बीमारियों का आशियाना बना लेता है। जो लोग अपने परिवार से प्यार करते हैं उन्हें आज ही नहीं, बल्कि अभी से तंबाकू को त्याग देना चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

हिंदी का हाल

पिछले सात दशकों में हिंदी को उसका संवैधानिक स्थान दिलाने के लिए समयानुसार देश के सभी शीर्षस्थ नेता सामने आए। उनमें से अनेक संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली के सामने आयोजित विश्व के सबसे लंबे धरने में भी शामिल हुए। अनेक बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हिंदी में व्याख्यान हुए। कई विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुए। सरकारी कार्यालयों में हिंदी दिवस/ हिंदी पखवाड़े के दौरान हिंदी की अस्मिता और आवश्यकता को लेकर अनेकानेक व्याख्यान हुए। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में कुछ वर्षों से विश्व हिंदी दिवस भी मनाए गए। हिंदी के उस वक्त के कई युवा पक्षधर आज ‘मार्गदर्शक मंडल’ के सदस्यों की उम्र को छूने लगे। बहरहाल, इन सात दशकों में हिंदी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। उसके कद में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वह आज भी प्रतीक्षा कर रही है उस दिन की, जब पूरी तरह अपने ‘राजभाषा’ संबंधी सभी अधिकारों को पा लेगी।
सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App