सावधानी का तकाजा

वर्तमान में प्रदूषण एक महामारी का रूप धारण किए हुए है।

सांकेतिक फोटो।

वर्तमान में प्रदूषण एक महामारी का रूप धारण किए हुए है। ध्वनि, वायु, जल, प्रकाश यानी पूरा वातावरण दूषित और प्रदूषित हो चला है। अगर हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी रोगग्रस्त और स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याओं की शिकार होगी। इससे बचने के लिए सावधान होना होगा। वातावरण को प्रदूषित होने से बचाना होगा। साथ ही सरकारों को चाहिए कि इन बातों का ध्यान सख्ती से रखें- पूरी ईमानदारी से वाहनों के प्रदूषण की जांच हो, केवल खानापूरी के लिए नहीं।

प्रदूषण संबंधी सारी जांच समितियां पूरी निष्ठा के साथ काम करे। जहां नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, उन्हें उपयुक्त रूप से दंडित करें। पालिथीन का पूर्ण बहिष्कार किया जाए, चाहे वह छोटा दुकानदार हो या बड़ी कंपनियां। लोगों में प्रदूषण के प्रति जागरूकता लाएं। सभी को प्रदूषण से फैलने वाली बीमारियों से पूरी तरह अवगत करना होगा। राजनेताओं और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों से लोगों की अपेक्षा है कि अपने रसूख से प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं को बंद करने में सहयोग दें। धूम्रपान पर हर जगह पूर्ण प्रतिबंध सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इन उपायों से प्रदूषण पर रोक लगा कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
’टी महादेव राव, विशाखापटनम, आंध्रप्रदेश

बिहार की शिक्षा

बिहार में घोषित तौर पर पिछले दो वर्षों से चल रही शिक्षकों की ‘महाबहाली’ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। कभी चुनाव का बहाना तो कभी खुद शिक्षा विभाग का अलग बहाना शिक्षक बहाली में रोड़ा बन कर सामने आ रहा है। चौरानबे हजार शिक्षकों के खाली पदों की बहाली अब भी कागजों तक सिमटी नजर आ रही है। व्यापक पैमाने पर बेहद जरूरी भर्तियां करने की तो दूर, मेरिट सूची में आए प्रतिभागियों की बहाली के लिए घोषित विज्ञापन के बजाय नई उलझनें खड़ी करके न केवल भावी शिक्षकों के जीवन, बल्कि राज्य के बच्चों के जीवन से खेल किया जा रहा है।

कोरोना काल ने शिक्षा व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया। खासकर प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बाधित रही। अब स्थिति व्यवहार में सामान्य हो चुकी लगती है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था कुंभकर्णी निद्रा में सोया हुआ है। इस बीच कई भावी शिक्षकों को कोरोना या फिर अन्य कारणों से अपनी जान गंवानी पड़ी। समझा जा सकता है कि जहां की सरकार और सरकारी महकमा ही इतनी सुस्त और लापरवाह हो या फिर सचेतन ऐसा कर रही हो, वहां न जाने कितने लोगों को अपने हक से वंचित होना पड़ेगा।

बहाली को लेकर कई बार आंदोलन हुए और हर बार की तरह मिला सिर्फ आश्वासन। अगर समय पर स्कूलों को शिक्षक नहीं मिल पाएगा तो शिक्षा का सुचारु रूप से संचालित होना नामुमकिन है। इससे नुकसान सिर्फ उन नौनिहालों को उठाना पड़ेगा जिस पर हमारा और देश का भविष्य निर्भर करता है। सरकार को जल्द से जल्द शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को पूर्ण कर राज्य के भविष्य के लिए चिंतित होने का सबूत देना चाहिए। अन्यथा सरकार की मंशा पर सवाल उठते रहेंगे।
’दीपक यादव, अररिया, बिहार

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