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चौपालः ‘हादसे का सबक’ और ‘तेल की मार’

वाराणसी में हुए फ्लाईओवर हादसे में मुख्य रूप से प्रशासन और सेतु निगम की लापरवाही सामने आई है।

Author May 28, 2018 5:31 AM
वाराणसी में फ्लाइओवर का एक हिस्‍सा जमीन पर आ गिरा।

हादसे का सबक

वाराणसी में हुए फ्लाईओवर हादसे में मुख्य रूप से प्रशासन और सेतु निगम की लापरवाही सामने आई है। हैरान करने वाली बात है कि जब इतनी भारी भरकम शहतीर खंबे पर रखी जा रही थी तो प्रशासन ने रास्ता बदलने के बारे में सोचा तक नहीं। और तो और, उसी क्षेत्र में वाहन पार्किंग भी सरकारी महकमे को नहीं दिखी।

इस तरह की लापरवाही आए दिन देश के किसी न किसी कोने में होती है, लेकिन सरकारें इसे रोकने की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रही हैं। नतीजतन, अनेक बेगुनाहों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। कार्यस्थल पर इंजीनियरों और अधिकारियों की अनुपस्थिति भी दुर्घटना का कारण बनती है। वाराणसी हादसे के दो घंटे बाद भी घायलों को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जा सका, यह प्रशासन की आपातकालीन व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

अब सरकार इस परियोजना में शामिल उन लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे जिनकी लापरवाही से यह भयावह दुर्घटना घटी। इसके साथ-साथ किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले उसके सुरक्षा मानक, आपातकालीन और आपदा प्रबंधन की उचित तैयारी, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की सुरक्षा, वैकल्पिक मार्ग तय करना और कार्यस्थल पर तैनात इंजीनियरों और अधिकारियों की उपस्थिति एवं देखरेख में ही कार्य संचालन होना चाहिए। तभी इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

अमरनाथ यादव, इलाहाबाद

तेल की मार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमत का हवाला देकर भारत में डीजल-पेट्रोल के दामों में बेहताशा वृद्धि जारी है। इसका खमियाजा आम लोगों को सभी वस्तुओं की ज्यादा कीमत देकर भुगतना पड़ रहा है। सरकार की लाचारी समझी जा सकती है लेकिन आम आदमी के आर्थिक हितों की सुरक्षा कौन करेगा? इसी सरकार के लोग जब विपक्ष में थे तो तेल के दाम बढ़ने पर कड़ा विरोध करते थे लेकिन आज वही काम वे खुद कर रहे हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से ही तेल के दाम तय होंगे तो सरकार छोड़ दे इसे खुले बाजार के हवाले और अन्य वस्तुओं की तरह इसे भी जीएसटी के दायरे में लाए।

तेल को कमाई का आसान जरिया बनाने की नीति से केंद्र सरकार और राज्य सरकार को परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही वह बिजली और सौर ऊर्जा के जरिए तेल के विकल्प के उपयोग को बढ़ावा दे।

मिथिलेश कुमार, भागलपुर

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