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किसका विकास

विकास का अर्थ अधिकतर भारतीयों के लिए यह नहीं है कि जापान जैसी बुलेट ट्रेन या अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसा भौतिक मूल ढांचा या स्मार्ट सिटी भारत में हो।

Author Published on: October 23, 2015 1:21 PM

विकास का अर्थ अधिकतर भारतीयों के लिए यह नहीं है कि जापान जैसी बुलेट ट्रेन या अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसा भौतिक मूल ढांचा या स्मार्ट सिटी भारत में हो। वह इसकी भी जटिलता नहीं समझ पाता कि बहुत सारा विदेशी निवेश भारत में आए या श्रम सुधार के नाम पर सरकार शोषण की व्यवस्था को मजबूत करे। बल्कि उसके लिए यह बात ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि वह अपनी निर्धारित आय के जरिए अपनी रोजमर्रा की उन सभी जरूरतों को पूरा कर सके, जिससे वह समाज में बिना भय और शर्मिंदगी के एक गरिमामय जीवन जी सके।

एक आम आदमी की मौलिक जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान मानी जाती है। इसमें रोटी (संतुलित आहार) सबसे महत्त्वपूर्ण है। लेकिन वर्तमान समय में आमतौर पर दालों और सब्जियों की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी ने इस संतुलित आहार को असंतुलित बना दिया है। अगर हम मनरेगा के एक मजदूर की बात करें, जो भारत के ग्रामीण समाज के एक आम आदमी को परिलक्षित करता है तो उसके एक दिन की मजदूरी से काफी अधिक एक किलो दाल का दाम है।

हम कल्पना कर सकते है कि जिस जनता ने अच्छे दिनों की आस में विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन किया, वह आज कितने बुरे दिनों में जीवनयापन करने को मजबूर है। बात यहां जितनी दाल या प्याज के मूल्य की है, उससे ज्यादा सरकार के पास दूरदर्शी कृषि नीतियों के अभाव की है। यह आवश्यक है कि एक उत्कृष्ट कृषि नीति का निर्माण हो जो आम आदमी की खाद्यान्न संबंधी जरूरतों के प्रति संवेदनशील हो और इसकी दीर्घकालीन उपलब्धता को सुनिश्चित कर सके।
’प्रदीप वर्मा, जेएनयू, नई दिल्ली

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