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भाजपा या बलात्कारी: किसके अच्छे दिन

लगता है कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने से किसी के अच्छे दिन आए हों या न हों, बलात्कार के आरोपी आसाराम के जरूर अच्छे दिन आ गए हैं। आएं भी क्यों नहीं! जिस देश के गृहमंत्री और वित्तमंत्री उनके भक्त हैं तो उनके अच्छे दिन आ ही गए भले ही वे जेल में हों। […]

Author March 18, 2015 8:00 PM
किसी के अच्छे दिन आए हों या न हों, बलात्कार के आरोपी आसाराम के जरूर अच्छे दिन आ गए हैं।

लगता है कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने से किसी के अच्छे दिन आए हों या न हों, बलात्कार के आरोपी आसाराम के जरूर अच्छे दिन आ गए हैं।

आएं भी क्यों नहीं! जिस देश के गृहमंत्री और वित्तमंत्री उनके भक्त हैं तो उनके अच्छे दिन आ ही गए भले ही वे जेल में हों। अमदाबाद से प्रकाशित आश्रम-पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ के पिछले अंक में गृहमंत्री के हवाले से लिखा है, ‘यह जानकर मुझे सुखद अनुभूति हुई कि पूज्य संत आसाराम बापू की प्रेरणा से 14 फरवरी को देश भर में मातृ पितृ पूजन दिवस कायक्रम हो रहे हैं।’

इसी अंक में वित्तमंत्री अरुण जेटली के हवाले से लिखा है, ‘मीडिया ट्रायल्स से हाई प्रोफाइल मामलों में अदालतों पर दबाव बनता है। मीडिया को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।’ इसके साथ ही संघ परिवार के सबसे बुजुर्ग नेता अशोक सिंघल ने लिखा है, ‘76 साल की उम्र में बापू जी को गलत तरीके से फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके बावजूद देश में संतों के प्रति श्रद्धा में किसी तरह की कमी नहीं आई है। बापू जी को बहुत कष्ट दिए गए हैं। उन्हें जमानत मिलनी चाहिर।’

यह भी गौर करने की बात है कि पिछले महीनों में इस मामले से जुड़े तीन गवाहों की हत्या भाजपा के सुशासित राज्यों में हो चुकी है। इससे इस मामले की क्या गति होगी, यह समझा जा सकता है। जेटलीजी देश के सबसे बड़े वकीलों में से एक हैं, उन्हें अदालतों पर दबाव बनने की बात शोभा नहीं देती। मीडिया को आत्म निरीक्षण करना चाहिए या नहीं, लेकिन भाजपा को जरूर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

आनंद मालवीय, इलाहाबाद

 

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