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चौपाल: लापरवाही का रेला

बिहार में बेतरतीब ढंग से चुनावी रैलियों का आयोजन और वहां विशाल जनसैलाब का इकट्ठा होना छह महीने से भी अधिक के संयम से पूर्णबंदी को तार-तार करने वाला है।

इस जुलूस में सोशल डिस्टेन्सिंग और कोरोना को लेकर बनाए गए अन्य नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं। फोटो सोर्स – ANI

बिहार में बेतरतीब ढंग से चुनावी रैलियों का आयोजन और वहां विशाल जनसैलाब का इकट्ठा होना छह महीने से भी अधिक के संयम से पूर्णबंदी को तार-तार करने वाला है। इन चुनावी रैलियों का आयोजन इतना तो अवश्य बताता है कि ये रैलियां जनता के हितार्थ नहीं, बल्कि राजनीतिक हित में किए जा रहे हैं।

लोकतंत्र की परिभाषा ‘जनता के लिए शासन’ वाली पंक्ति को झूठ सिद्ध कर रहे हैं, क्योंकि जब जनता ही बीमार और लाचार हो जाएगी तो यह तमाम रैलियां और चुनावी वादे भला किस काम के रहेंगे। इन पार्टियों की ‘जनता भलाई और जनता जनार्दन’ वाले बोल अब बेमानी लगने लगी है। आखिर हो भी क्यों नहीं! दरअसल, लोगों के जान की कीमत पर अप्रत्यक्ष रूप से ये पार्टियां स्वहित साधने में लगे हैं।
’स्वर्ग सुमन मिश्रा, वैशाली, बिहार

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