ताज़ा खबर
 

चौपाल: चुनावी चकाचौंध

बिहार के लोगों को कोरोना का टीका मुफ्त में मिलेगा। तो फिर बाकी राज्यों का क्या? अगर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू की सरकार नहीं बनती तो क्या तब भी मुफ्त में बिहार की जनता को टीका मिलेगा?

bihar elections 2020 bihar elections first time votersतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (पीटीआई)

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे नेताओं की रैली और उनके अनोखे वादे बढ़ते जा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 28 अक्तूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को तीन चरणों में होने हैं, जिसका परिणाम 10 नवंबर को आना है। लिहाजा बिहार की हर राजनीतिक पार्टी जनता को लुभाने में लगी है। बिहार में इस बार जदयू और राजद में सीधी टक्कर है, जो पिछला चुनाव में साथ में लड़े थे। जाहिर है, यह चुनाव दोनों पार्टियों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

राजद नेता तेजस्वी यादव इस बार चुनाव में सरकार को बेरोजगारी, शिक्षा, गरीबी, पलायन, घोटाला, नौकरी और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने जैसे मुद्दों को लेकर नीतीश सरकार पर जम कर बरस रहे हैं और उनकी चुनावी रैलियों में उमड़ती भीड़ को देख कर ऐसा लगता है कि इन सब मुद्दों पर जनता भी तेजस्वी यादव के साथ है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपनी चुनावी रैलियों में राज्य की जनता से दस लाख नौकरियां देने का वादा किया है, जिसके जवाब में अब जदयू की अगुआई में बिहार चुनाव लड़ रही भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में उन्नीस लाख रोजगार के अवसर और राज्य की जनता को कोरोना का टीका मुफ्त में देने की बात कही है।

ऐसे में सवाल उठता है जब भाजपा और जदयू की डबल इंजन वाली सरकार उन्नीस लाख रोजगार के अवसर दे सकती थी तो फिर पिछले पंद्रह सालों में दिया क्यों नहीं? जनता का वोट लेने के लिए भाजपा ने एक और वादा किया है। बिहार के लोगों को कोरोना का टीका मुफ्त में मिलेगा। तो फिर बाकी राज्यों का क्या? अगर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू की सरकार नहीं बनती तो क्या तब भी मुफ्त में बिहार की जनता को टीका मिलेगा? जनता कैसे भरोसा करे? प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश के संबोधन में कहा था कि वैक्सीन कब और कैसे दी जानी है, इन सब पर काम और विचार किया जा रहा है।

तो क्या प्रधानमंत्री की डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की उच्च स्तरीय कमिटी ने प्रधानमंत्री को यह सलाह दी होगी? बहुत मुमकिन है कि मुफ्त में टीका देने का वादा भी हर खाते में पंद्रह लाख रुपए और हर साल दो करोड़ नौकरियां देने वाले वादे की तरह जुमला हो। और अगर ऐसा नहीं है तो फिर मुफ्त टीका का खर्च सरकार कैसे उठाएगी? दूसरे राज्यों में क्या होगा? हाल ही में हुए जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में केंद्र सरकार ने यह साफ कह दिया था कि उसके पास राज्यों को देने के लिए उनके हिस्से का पैसा नहीं है।

इसीलिए राज्य ऋण ले लें। ऐसे वक्त में क्या सच में सरकार मुफ्त में टीका दे सकती है? सोचने वाली बात है। उम्मीद है कि बिहार की जनता इस बार विधानसभा चुनाव में अपने वोट का सही इस्तेमाल करे और हवाई वादों के बजाय असल मुद्दों के आधार पर अपना कीमती वोट दे।
’गौरव कुमार, गया, बिहार

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: दंगों का दर्द
2 चौपाल: दर्पण में आंसू
3 चौपाल: चिंता के पायदान
ये पढ़ा क्या?
X