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चौपाल: नैतिकता ही रास्ता

यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन में हम जो कुछ भी धन-संपत्ति भ्रष्ट कर्मों से प्राप्त करते हैं, वह न तो हमें सुख दे सकती है, न ही परिवार के अन्य सदस्यों को। बल्कि आखिरकार यह हमें कष्ट ही देती है।

Politicsभ्रष्‍टाचार देश के विकास में बाधक। सांकेतिक फोटेा।

‘भ्रष्टाचार का फैलता नासूर’ (लेख, 24 दिसंबर) पढ़ कर दुनिया में प्रति दिन फैल रहे भ्रष्टाचार के स्वरूप पर हैरानी नहीं हुई। आज एशिया में भ्रष्टाचार के मामले में प्रथम स्थान पर रहने वाला यह वही भारत है, जिसे कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था और यहां के लोगों को बहुत सभ्य और सुसंस्कृत माना जाता था। मगर क्या हो गया कि यह भ्रष्टाचार के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच गया? यह सही है कि भ्रष्टाचार आज संसार के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है।

यह मानव समाज की सबसे बड़ी समस्या है। भ्रष्टाचार व्यक्ति के द्वारा किया जाता है और यह समाज में ही होता है। जबकि यह समाज को ही तकलीफ पहुंचाता है और नई समस्याएं खड़ी करता है। सवाल है कि भ्रष्टाचार आखिर क्यों किया जाता है। अपनी असीमित इच्छाओं, कामनाओं को पूर्ण करने के लिए या फिर भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए? यह याद रखना चाहिए कि कोई भी भौतिक सुख व्यक्ति को कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकता।

यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन में हम जो कुछ भी धन-संपत्ति भ्रष्ट कर्मों से प्राप्त करते हैं, वह न तो हमें सुख दे सकती है, न ही परिवार के अन्य सदस्यों को। बल्कि आखिरकार यह हमें कष्ट ही देती है। जब हम इस संसार को छोड़ कर जाते हैं तो यह संपत्ति यहीं छूट जाती है, जिसके पीछे हम जीवनपर्यंत भागते रहते हैं। मृत्यु एक ऐसी चीज है, जो सबकी होनी है। मृत्यु का स्मरण हमें नैतिक बना सकता है।

आज भारत में बच्चे भी जानते हैं कि भ्रष्टाचार क्या होता है और कैसे होता है। जाहिर है, हमें बच्चों की शुरुआती दौर से ही शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का समावेश करना पड़ेगा। अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा देकर उन्हें श्रेष्ठ बनाना पड़ेगा, क्योंकि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं।

आज हम हर क्षेत्र में उन्नति करने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ हम अवनति को भी साथ में लेकर चल रहे हैं। सरकारी विभागों में बहुत भ्रष्टाचार बहुत होता है, लेकिन निजी क्षेत्र भी आज भ्रष्टाचार की बुनियाद पर ही टिका है। भले ही इसका स्वरूप अलग हो। जहां मुनाफे की लालच और शक्ति होगी, वहां भ्रष्टाचार होगा।
’आशीष रमेश राठोड़ ‘रूह’, चंद्रपुर, महाराष्ट्र

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