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चौपालः अब आगे का सफर

जगजाहिर है कि पिछले कई चुनाव के दौरान हमेशा राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा और इस मुद्दे ने राजनीतिक पार्टियों के परिणाम पर भी असर डाला। शायद यह मुद्दा अब समाप्त हो चुका है तथा नया अध्याय शुरू हो चुका है।

कोरोना संक्रमण के बाद से विकास मार्ग पर अनेक नई चुनौतियां खड़ी हो चुकी हैं, जिससे निपटने के उपाय तलाशना जरूरी है।

‘आस्था की नींव’ (संपादकीय, 6 अगस्त) पढ़ा। आखिरकार यह सुनिश्चित हो गया कि भूमि पूजन के बाद अब भव्य राम मंदिर भी वहीं बनेगा। दरअसल, यह दो समुदाय की आस्था का प्रश्न था, इसलिए कई वर्षों तक राम जन्मभूमि के विवाद को लेकर न्यायालय में कानूनी लड़ाई चलती रही, जहां कदम-कदम पर राजनीति, कानूनी पेचीदगियां, धीमी न्यायिक प्रक्रिया और अनपेक्षित घटनाएं देखने को मिलीं। अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदाय के पार्टियों का पक्ष सुनने के बाद साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया और अब उस स्थान पर राम मंदिर बनेगा।

जगजाहिर है कि पिछले कई चुनाव के दौरान हमेशा राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा और इस मुद्दे ने राजनीतिक पार्टियों के परिणाम पर भी असर डाला। शायद यह मुद्दा अब समाप्त हो चुका है तथा नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब शायद भविष्य में चुनाव के दौरान विकासवादी मुद्दे उठने की उम्मीद की जा सकती है। दरअसल, कोरोना संक्रमण के बाद से विकास मार्ग पर अनेक नई चुनौतियां खड़ी हो चुकी हैं, जिससे निपटने के उपाय तलाशना जरूरी है। अब मंदिर के सवाल से आगे देश की सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ, कृषि, गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, अपराध, महिला सुरक्षा, भाई-भतीजावाद, पर्यावरणीय समस्याएं, कोरोना संक्रमण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कार्य करना होगा। तभी देश असल में विकसित बन पाएगा।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली, नागपुर

नुकसान का नशा
पंजाब में शराब से हुई मौतों ने एक नई बहस छेड़ दी है। देश के हर छोटे-बड़े राज्य शराब के अवैध धंधे की चपेट में हैं। शराब पीने से हुई मौतों के आंकड़े डराने वाले हैं। फिर भी न तो यह धंधा, न ही मौतों का सिलसिला रुकने का नाम लेता है। कुछ राज्यों में शराबबंदी जैसी सख्ती के बावजूद कानून को अमली जामा देने वाले विभागों की उदासीनता का खामियाजा आए दिन आम लोगों को उठाना पड़ता है। निश्चित रूप से शराब की लत बुरी है, मगर पैसे कमाने और गंवाने का नशा कुछ भी करा देता है। बेचने वाला अंधाधुंध कमाई करता है और पीने वाला गंवाता जाता है।

नतीजतन, अंधेरे में अवैध शराब का गोरखधंधा फलता फूलता रहा है। आखिर शराब से जुड़े कानून और सरकारी सख्ती में कहीं तो दरार है। मुआवजा समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी है कि पुलिस, आबकारी विभाग और संबंधित निगरानी को ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। संभव हो तो कानूनी बदलाव के साथ मुआवजे की राशि जिम्मेदार लोगों से वसूली जाए।
’एमके मिश्रा, रांची, झारखंड

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