मुद्दों से परे

सभी राज्यों के मुद्दे और समस्याएं अलग-अलग हैं।

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ईवीएम। फाइल फोटो।

सभी राज्यों के मुद्दे और समस्याएं अलग-अलग हैं। अगर विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों और समस्याओं पर आधार पर लड़ा जाए, तो यह आम जनता और प्रदेश के हित में होता है। पिछले कुछ वर्षों से देश की राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द घूम रही है। सभी चुनावों में वे एक अहम मुद्दा होते हैं। देश के पांच राज्यों में चल रहे चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री एक अहम मुद्दा हैं। सभी विपक्षी पार्टियां मोदी के ऊपर हमला कर रही हैं और मुख्य मुद्दे से जनता को भटका रही हैं। कोरोना के साए में हो रहे चुनाव में भी महामारी, बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि मुद्दों की प्राथमिकता नहीं रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश में एक ओर अयोध्या, काशी और मथुरा की चर्चा हो रही है तो दूसरी ओर जिन्ना के गुणगान गए जा रहे हैं। जनता उन्हीं मुद्दों में उलझ कर रह जाएगी। बुनियादी समस्याओं की कोई चर्चा नहीं हो रही है। पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में है, अब सिद्धू का पाकिस्तान से संबंध का मुद्दा भी उठाया जा रहा है, लेकिन पंजाब की बुनियादी समस्याएं नशाखोरी, तस्करी, आतंकवाद, बेरोजगारी और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों की चर्चा किसी भी राजनीतिक दल द्वारा नहीं की जा रही है। प्रदेश के चुनाव में भी राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों का हावी रहना आम जनता के लिए हानिकारक है।

  • हिमांशु शेखर, केसपा, गया

ईंधन का विकल्प

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ झुकाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने पहले इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में उतारा, लेकिन कार और दुपहिया वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन न होने की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदी पर ब्रेक लग गया था। इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए देश के कई राज्यों में सुविधा के नाम पर चार्जिंग स्टेशन की कमी दूर की जा रही है।

शहर के हर दो या तीन किलोमीटर और नेशनल हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाया जा रहा है। पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही र्इंधन की बचत के लिए राज्य और केंद्र सरकार प्रोत्साहन दे रही है। गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदी और चार्जिंग स्टेशन को लेकर सुविधा मुहैया की जा रही है। हमें र्इंधन की बचत के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदी का लक्ष्य रखना चाहिए। र्इंधन वाली गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत ज्यादा रहने से ग्राहकों की परेशानी बढ़ रही है। लेकिन हमेशा-हमेशा की परेशानी से निजात मिल जाएगी।

  • कांतिलाल मांडोत, सूरत

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