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चौपालः सुरक्षा की खोह

सुरक्षित होने का ढिंढोरा पीटने से बेहतर होगा कि एक सजग नागरिक होने के नाते जो हताहत हुए हैं उनके लिए कुछ किया जाए, उनके बारे में सोचा जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं-दुर्घटनाओं से वक्त रहते निपटा जा सके।

Author June 19, 2018 4:27 AM
मुंबई की जिस 35 मंजिला इमारत में आग लगी उसमें कई ‘सेलिब्रिटीज’ के फ्लैट भी थे, और जिनमें से कुछ तो आगजनी के दौरान फ्लैट में ही मौजूद थे।

हाल ही में मुंबई से खबर आई कि वहां के प्रभादेवी इलाके की 35 मंजिला इमारत ब्यूमोंड टॉवर में आग लग गई। मुंबई जैसे महानगर में आग लगने की यह कोई नई घटना नहीं थी, कुछ समय पहले भी वहां के लोवर परेल इलाके के कमला मिल परिसर स्थित हुक्का बार में आग लगी थी, जिसमें 15 जानें गई थीं। तब प्रशासन ने आनन-फानन में अपनी पारंपरिक नीति ‘जब जागो तब सवेरा’ के तहत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य रेस्तरांओं पर भी सख्त कार्रवाई इसलिए कि सरकार पर किसी भी तरह का कोई दबाव न बने। इस बीच प्रशासन की अगली कार्रवाई जहां भी होती वहां सरकारी ठेकेदार बाद में और कैमरामैन पहले पहुंच जाते और उस त्वरित कार्रवाई का ‘लाईव शो’ दिखाया जाता। मुंबई क्या, हमारे देश के अन्य शहरों का भी कमोबेश यही हाल है। फैक्ट्री, गोदाम, दुकान, तो कभी रेस्तरां, घर, ऑफिस और कभी जंगलों में भयानक आग। आग लगने के अधिकतर मामलों में वहां मौजूद लोगों की लापरवाही ही एक बड़ी वजह बन कर सामने आती है।

बहरहाल, मुंबई की जिस 35 मंजिला इमारत में आग लगी उसमें कई ‘सेलिब्रिटीज’ के फ्लैट भी थे, और जिनमें से कुछ तो आगजनी के दौरान फ्लैट में ही मौजूद थे। गनीमत रही कि जो मौजूद थे वे सब सुरक्षित थे और वक्त रहते आग पर काबू पा लिया गया था। इसी बीच उन्हीं सेलिब्रिटीज में से एक शीर्ष की नायिका अपने फ्लैट में बड़े ही सुकून से सोफे पर बैठ कर ट्विटर अकाउंट पर ‘स्माईली’ पास करते हुए ट्वीट करती हैं कि ‘शुक्र है, मैं सुरक्षित हूं’। और फिर शुरू हो गया ट्वीट, रीट्वीट्स, लाईक, शेयर, कमेंट्स का दौर। मैडमजी इन सबमें व्यस्त, मगर नीचे के 26वें माले पर सब अस्त-व्यस्त! आप तो सुरक्षित होंगी ही मैडमजी, मगर उनका क्या जो हताहत हुए हैं!

खैर, कभी-कभी तो हम घर बैठे-बैठे ही ‘शुक्र है, मैं सुरक्षित हूं’, ‘मेरा घर परिवार सुरक्षित है, मेरे बाल बच्चे सुरक्षित हैं’ वाली मानसिकता के शिकार हो जाते हैं। हम किसी समाचारपत्र या टीवी की खबरों में देखते हैं कि कश्मीर के राजौरी में आतंकवादियों द्वारा रिहायशी इलाके में घुसकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को निशाना बना कर की गई अंधाधुंध फायरिंग से दो मासूम बच्चों व एक बुजुर्ग की मौत हो गई। ऐसे में हम अपने घर बैठे-बैठे खुद को कितना महफूज महसूस करते हैं! कभी खबर आती है कि ब्रह्मपुत्र में पानी का स्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए। तब भी हम सुकून की सांस लेने से नहीं चूकते। कहीं बम फटा, कई लोग हताहत भी हुए, मगर हम सुरक्षित हैं। बहरहाल, खुदा हमें और हमारे आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित ही रखे तो अच्छा है। मगर सुरक्षित होने का ढिंढोरा पीटने से बेहतर होगा कि एक सजग नागरिक होने के नाते जो हताहत हुए हैं उनके लिए कुछ किया जाए, उनके बारे में सोचा जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं-दुर्घटनाओं से वक्त रहते निपटा जा सके।

पुखराज सोलंकी, बीकानेर, राजस्थान

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