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चौपाल: चीन से दोस्ती

अब कोरोना संक्रमण की समस्या से संघर्ष करना है। अब हमें जागरूकता की आवश्यकता है। इस कोरोना विषाणु के संक्रमण काल के कड़वे घूंट पीने के बाद हमें अपनी नीतियों, सिद्धांतों में परिवर्तन करना ही होगा। अब किसी भी चीनी उत्पाद की सामग्रियों का एक जुट होकर बहिष्कार करना होगा।

Author Published on: April 29, 2020 1:19 AM
chinaचीन ने भारत के कदम पर नाखुशी जाहिर की है। (फाइल फोटो)

देश मे कोरोना माहमारी का दौर जारी है। इस संक्रमण काल मे सरकार कई ठोस और कारगर कदम उठा रही है ताकि इस संकट से जल्द समाधान मिल सके। इसी कारण भारत द्वारा कोरोना संकट के बीच चीन सहित बाकी देशों से रैपिड एंटीबाडी जांच किट मंगवाए गए थे। और अकेले चीन से पांच लाख किट खरीदे गए। परन्तु राज्य सरकारों की ओर से इनके नतीजे गलत आने की शिकायत के बाद भारत सरकार ने किट लौटाने का फैसला किया।

यह बात समझ से परे है कि हम अभी भी चीन की कूटनीतियों से अनभिज्ञ है..?कई बार चीन के भारत के प्रति दोहरे मापदंड की रही है और मुख में राम बगल में छुरी, जैसी मानसिकता कहावत को चरितार्थ करती है। फिर हम क्यों चीन से व्यपारिक संबंधों को जारी रखे हुए हैं? विगत वर्षों से पाकिस्तान को शह देने वाले चीन को हमारी भारतीय संस्कृति, सभयता और मानवता, इंसानियत और अतिथि देवो भव के आचरण रास नही आ रहे। क्या किट खरीदने के लिए चीन ही था हमारा विकल्प…? हमे अब चीन से कोई अपेक्षा, या उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। जो चीन से आना था, वह आ गया विषाणु के रूप में।

अब कोरोना संक्रमण की समस्या से संघर्ष करना है। अब हमें जागरूकता की आवश्यकता है। इस कोरोना विषाणु के संक्रमण काल के कड़वे घूंट पीने के बाद हमें अपनी नीतियों, सिद्धांतों में परिवर्तन करना ही होगा। अब किसी भी चीनी उत्पाद की सामग्रियों का एक जुट होकर बहिष्कार करना होगा। चीन से प्रदत्त कोरोना विषाणु ने हमारी आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक पहलुओं को मरणासन्न कर दिया। जिस वजह से आर्थिक संतुलन गड़बड़ा गया। हम दूसरे देशों से बिल्कुल संबंध रखें, लेकिन चीन से नहीं।
’योगेश जोशी, बड़वाह (मप्र)

विपक्ष का रवैया
देश के कुछ नेताओं ने राजनीति को मानवता के ऊपर रख दिया हैे, जहां एक तरफ पूर्णबंदी जल्द खत्म नहीं होने कि आशंका के कारण लोगों में घबराहट बढ़ रही है, वहीं हमारे कुछ नेता देश को जोड़े रखने की जगह देश की एकता तोड़ने पर तुले हैें। विपक्ष के बयान निराश करने वाले हैं, जैसे- देश का गरीब कब जागेगा? इस तरह का बयान देकर कुछ वर्गों को उकसाने का काम करते हैे तो कोई “आगरा मॉडल फैल है” जैसे बयान से सरकार का और देश का मनोबल तोड़ने का काम करता है।

विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता कि हद तो तब हो गई जब पूर्णबंदी को ही असंवैधानिक बता दियो देश का विपक्ष अपने अभिव्यक्ति कि आजादी और देशद्रोह के बीच का अंतर भूल गया हैे। विपक्ष को इस समय मानवता के साथ खड़े होकर एकता का परिचय देना चाहिए, न कि अवसर का लाभ उठा कर राजनीतिक रोटियां सेकनी चाहिए।
’आयुषी दुबे, कानपुर

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