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चौपाल: असली चेहरा कौन?

सवाल है कि आखिर ये कौनसी ताकतें हैं जो भारत को गर्त में धकेल रही हैं? इनके असली चेहरे को बेनकाब करना जरूरी हो गया है। हाल ही में कई वैश्विक संस्थाओं ने यह उम्मीद जताई थी कि इस सकंट काल में भारत एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है। भारत के पास अवसर है कि वह अपनी क्षमता का प्रदर्शन करें। लेकिन इस तरह की घटनाएं भारत की छवि को धूमिल कर रही हैं।

Author Published on: April 7, 2020 1:24 AM
कोरोना वायरस हो रहा और भी खतरनाक, लक्षण मिलने से पहले ही दूसरे लोगों को कर सकते हैं संक्रमित

इंदौर में पिछले हफ्ते टाटपट्टी बाखल इलाके में कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए गई टीम पर हुए हमले ने आधुनिक भारत के सभ्य समाज को कलंकित करने की सारी हदें पार कर दीं। दूसरी ओर, दिल्ली में पूर्ण बंदी होते हुए भी निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात का मामला सामने आया, जिसने कोरोना महामारी को फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। सिलसिलेवार हुई इन दोनों ही घटनाओं ने इस देश को सोचने पर मजबूर अवश्य किया है।

सोचने वाली बात यह है कि एक तो पूर्ण बंदी के रहते इन धर्म प्रशिक्षुओं की इतनी तादाद में भीड़ कैसे जमा हो गई? साथ ही जिस टाटपट्टी बाखल इलाके में हमला हुआ, वह हाई रिस्क जोन के अंतर्गत आता है और इस इलाके में तो सुरक्षा मजबूत होगी ही। वैसे बंदी के दौरान हर जगह पुलिस रहती है, लोगों के आने-जाने पर नजर रहती हैं, तो फिर अचानक से सौ से ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना क्या किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है? आखिर जान बचाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और दिल्ली मे कोरोना पीड़ितों का इधर-उधर थूकने जैसी घटनाएं क्या संदेश देती हैं। सवाल है कि आखिर ये कौनसी ताकतें हैं जो भारत को गर्त में धकेल रही हैं? इनके असली चेहरे को बेनकाब करना जरूरी हो गया है। हाल ही में कई वैश्विक संस्थाओं ने यह उम्मीद जताई थी कि इस सकंट काल में भारत एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है। भारत के पास अवसर है कि वह अपनी क्षमता का प्रदर्शन करें। लेकिन इस तरह की घटनाएं भारत की छवि को धूमिल कर रही हैं।
’अमर सिंह सोढा, मूलाना (जैसलमेर)

सहयोग जरूरी
आज पूरा भारत कोरोना के खिलाफ पूर्ण बंदी के माध्यम से जंग लड़ रहा है। लेकिन दूसरी ओर, इसी देश मे तबलीगी जमात के सैकड़ों लोगों ने सबसे बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। तबलीगी जमात के लोगों को जब कोरोना की जांच के लिए बसों में ले जाया जा रहा था, तभी कुछ लोग बस से बाहर थूंकने लगे। इससे भी ज्यादा शर्मनाक हरकत तबलीगी जमात के मरीजों ने गाज़ियाबाद स्थित एमएमजी अस्पताल में महिला नर्सों के साथ की। इंदौर में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए पहुंची टीम पर हमले किए गए। ऐसे कृत्यों की एक सभ्य समाज में कोई जगह नही है। आज योद्धा बन कर डाक्टर और अस्पताल कर्मी मरीजों को बचाने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ शरारती लोग ऐसी हरकतों से इन योद्धाओं का मनोबल तोड़ रहे हैं। अगर हमें कोरोना से जंग जितनी है, तो डाक्टरों का मनोबल बढ़ाना और उनके साथ सहयोग करना जरूरी है।
’अजीत यादव, रोहिणी, दिल्ली

पुलिस पर हमले
कोरोना के बढ़ते संक्रमण से देश में दहशत का माहौल बना हुआ है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का यही कहना है कि इस महामारी से बचने का सिर्फ एक ही रामबाण उपाय है कि हम अपने घरों में ही रहें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। इसी के चलते देश में संपूर्ण बंदी की गई है। पर कुछ लोग अब भी इस संकट की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं और संपूर्ण बंदी में भी बिना वजह सड़कों पर निकल रहे हैं और पुलिस के द्वारा रोके जाने पर वे पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर के मोरना से भी ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां लोगों को घरों में रहना इतना नागवारा था कि उन्होंने पुलिस पर ही हमला कर दिया, जिसमें दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हम सभी स्वस्थ रहें, इसीलिए वर्दी में लोग दिन-रात सड़कों पर मुस्तैद हैं। और हमने उनके साथ ऐसा व्यवहार करके मानवता की सभी सीमाओं को पार कर दिया है।
’स्वर्णिमा बाजपेयी, देहरादून

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