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चौपाल- कितने तैयार

शस्त्र, अस्त्र के साथ और भी कई बातें होती हैं जो युद्ध की तैयारी में महत्त्वपूर्ण होती है।
Author October 12, 2017 06:11 am
कुछ लोगों ने सरकार से सवाल किया कि इस तरह हम अपने सैनिकों के शवों के साथ व्यवहार करते हैं। हम किस प्रकार के राष्ट्रवादी हैं? (Photo: Twitter)

कितने तैयार
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद हुए जवानों के शवों को पॉलीबैग और पेपर बॉक्स में रखे जाने की तस्वीर सामने आने पर विवाद हो गया है। जहां यह हादसा हुआ, वहा बॉडीबैग्स नहीं थे, ऐसा सेना का कहना है। लेकिन दुर्घटना हो या न हो, हमें हमेशा तैयार रहना जरूरी है। जो चीजें बाद में मुहैया करा दी जाती हैं, वे पहले ही मुहैया क्यों नहीं की जाती? ऐसी तैयारी क्यों नहीं रहती? भारत तरक्की कर रहा है, ऐसा कहा जाता है। लेकिन शहीद जवानों के साथ जो हुआ है, उससे पता चलता है कि सेना को कितनी तैयारी करना शेष है।

दुश्मन के साथ युद्ध के लिए हम किसी भी समय तैयार हैं, ऐसा बताया जाता है। लेकिन जिस देश से अपने जवानों के शवों को ठीक तरह से संभालने में गलती हुई हो, उससे यह साफ हो जाता है कि हम युद्ध के लिए कितने तैयार हैं। शस्त्र, अस्त्र के साथ और भी कई बातें होती हैं जो युद्ध की तैयारी में महत्त्वपूर्ण होती है। उनकी पूर्ति के लिए केंद्र और सेना दलों को आवश्यक बातों पर ध्यान देना होगा। विकास की कुछ योजनाएं पीछे रहीं तो भी चल सकता है, लेकिन रक्षा मंत्रालय पर विशेष ध्यान देना आज की जरूरत है।
’जयेश राणे, मुंबई

असुविधा का सफर
महंगाई आम जनता को दिनोंदिन अपने कहर से बेबस करती जा रही है। ऐसे में मेट्रो का किराया बढ़ा दिए जाने ने दोहरी मार की है। मई महीने में ही किराया बढ़ा था और अब एक बार फिर लोगों पर बोझ लाद देना क्या न्यायसंगत हैं? दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप की सियासत करने में ही लगे रहेंगे।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि वे मेट्रो को डीटीसी बस बनने नहीं दे सकते। सवाल है कि अगर डीटीसी की हालत खराब है तो उसमें सुधार के लिए सरकारें क्या कर रही हैं? दरअसल, सभी पार्टियों ने मेट्रो किराए को अपना वोट बैंक बढ़ाने का एक मुद्दा बना लिया है। सच यह है कि किसी को मेट्रो किराया बढ़ने और महंगाई बढ़ने से कुछ लेना-देना नहीं। इसकी मार आम लोगों को ही झेलनी होगी।
’पूजा सिंह, दिल्ली

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