ताज़ा खबर
 

अंधविश्वास की बीमारी

हमारे देश मे अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत है, यह इससे पता चलता है कि कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी के बावजूद कुछ लोग डॉक्टर की बात न मान कर अपनी जान खतरे में डाल कर टोने-टोटके और बाबाओं के नुस्खे का सहारा ले रहे हैं।

सांकेतिक फोटो।

हमारे देश मे अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत है, यह इससे पता चलता है कि कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी के बावजूद कुछ लोग डॉक्टर की बात न मान कर अपनी जान खतरे में डाल कर टोने-टोटके और बाबाओं के नुस्खे का सहारा ले रहे हैं। समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों से अंधविश्वास की चौंकाने वाली बात रहती हैं। बीते वर्ष बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के कई हिस्सों से कोरोना मैया की पूजा करने की खबरें आई थीं। हाल ही में गुजरात मे लोग अपने शरीर पर गोबर मलते नजर आए थे। जबकि उनको डॉक्टरों ने उन्हें सचेत किया था कि ये सब करने से कोरोना तो खत्म होगा नहीं, बल्कि इससे उन्हें कवक संक्रमण समेत दूसरे संक्रमण हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश के रायगढ़ जिले से एक और चौंकाने वाली खबर आई, जहां लाखों की संख्या में लोग बिना मास्क लगाए जान खतरे मे डाल कर कथित रूप से देव परियों द्वारा छुए पानी को पीने के लिए उमड़ पड़े। विडंबना है कि सरकार द्वारा पिछले डेढ़ साल से लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे कोरोना से बचाव के सारे उपायों को लेकर सावधानी बरतें, लेकिन अंधविश्वास की जाल में फंस चुके लोगों को समझाना मुश्किल है।

लोगों को समझने की जरूरत है कि अंधविश्वास वह बीमारी है जो कोरोना से भी खतरनाक है। यह इंसान के शरीर के लिए जहर है और यह जब पूरे शरीर में फैल जाता है तो एक इंसान दूसरे इंसान के लिए खतरनाक बन जाता है। जरूरत है कि सरकार के साथ-साथ आम नागरिक भी लोगों के बीच अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने में पूर्ण रूप से सहयोग दे। तभी इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
’गौरी सिंह, फरीदाबाद, हरियाणा

सावधानी बनी रहे

अगले साल की शुरुआत में ही कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और उसी समय कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका भी जताई जा रही है। चुनाव आयोग को अभी से इस बारे में सोचना होगा कि क्या उस समय चुनावी रैलियां करने की इजाजत दी जाए। अगर फिर पिछली गलती को दोहराया गया तो बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। अगर सरकार सबको टीका देने में सफल भी हो जाए तो भी सावधानी बरते जाने में ही समझदारी होगी।
’नवीन थिरानी, नोहर, राजस्थान

Next Stories
1 नाहक दखल
2 अच्छी पहल
3 अभिव्यक्ति पर अंकुश
ये पढ़ा क्या?
X