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विस्तार के भूखे

हांगकांग में की गई ज्यादतियों पर ठंडी प्रतिक्रिया मिलने के बाद चीनी सेना का साहस अब और बढ़ गया है।

ताइवान के हवाई क्षेत्र के भीतर चीनी लड़ाकू विमानों ने घंटों उड़ानें भरी।

हांगकांग में की गई ज्यादतियों पर ठंडी प्रतिक्रिया मिलने के बाद चीनी सेना का साहस अब और बढ़ गया है। इसी का नतीजा है कि पिछले सोमवार को ताइवान के हवाई क्षेत्र के भीतर पच्चीस चीनी लड़ाकू विमानों ने घंटों उड़ानें भरी। यह खुल्लमखुल्ला अंतराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन है। एक संप्रभु राष्ट्र के स्वाभिमान पर चोट पहुंचाने का षड्यंत्र है।

चीन के दुस्साहस के बाद एक और एकतंत्रवादी देश रूस ने उक्रेन पर हमले करने की सारी तैयारी कर ली है। इससे क्या समझा जाए। दो बड़े देश, जिनके पास सुरक्षा परिषद् की वीटो शक्ति है, क्या वे अब खुल कर मनमानी करने पर तुल गए हैं? शेष विश्व जब महामारी से जूझने में लगा है, ये दोनों अपने विस्तारवादी नीतियों को अमली जामा पहनाने में लग गए हैं। अब भी दुनिया तमाशबीन बनी रही तो उक्रेन और ताइवान को क्रमश: रूस और चीन का हिस्सा होने में देर नहीं लगेगी।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड

बेरहमी की छवि

कोरोना महामारी के चलते बंदी और प्रतिबंधों के बीच पुलिसकर्मी जिस प्रकार से आमजन के साथ पेश आ रहे हैं, यह रवैया ठीक नहीं है। खंडवा में संक्रमित मरीज को पुलिस ने पीटा, हाथ-पैर जोड़ रही मां-बहन पर भी लाठियां बरसाई। पुलिस का यह बेरहम चरित्र दमनकारी होने के साथ तानाशाही की प्रवृत्ति को उजागर करने वाला है। ऐसा लगता है जैसे यह एक आजाद देश की पुलिस न होकर अंग्रेजों के जमाने की पुलिस है। इससे जहां पुलिस की छवि खराब हो रही है, वहीं प्रदेश सरकार की छवि पर भी दाग लग रहा है।

महामारी से सब डरे हुए हैं। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जो खबरें मिलती हैं, विशेषकर अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज नहीं होना, जिंदा आदमी जाता है, मरा हुआ निकलता है। इस प्रकार की खबरें लोगों के मन में भ्रम बना रही हैं। यह सब सुन और जानकर कई लोग चोरी-छिपे अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। यही कारण है कि संक्रमित मरीज भय और डर के चलते अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते हैं। पुलिस को अपना दमनकारी रवैया त्यागना होगा। पुलिस आम जनता की सुरक्षा के लिए है, न कि उन पर बेरहमी से डंडे बरसाने के लिए। सरकार का दायित्व है कि वह पुलिसकर्मियों को हिदायत दे कि इस प्रकार के दर्दनाक दृश्य के वे निमित्त न बनें, बल्कि भाईचारे और सौहार्द के साथ समझाइश दें, ताकि जनता के भीतर इस महामारी से मुकाबला करने के लिए मनोबल बढ़े।
’हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, मप्र

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