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चौपाल: प्रकृति की चेतावनी

जिस तरह से मनुष्य प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करके, नदियों, पहाड़ों, वनों और प्राकृतिक संपदा के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और विकास की अंधी दौड़ में भाग रहा है, उससे तो मानव जीवन के अस्तित्व को खतरा ही पैदा होना है।

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विज्ञान की तरक्की के बलबूते पर मनुष्य सोचता है कि वह सर्वशक्तिमान है। लेकिन अभी दुनिया को विनाश की राह पर ले जाने वाले कोरोना विषाणु, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा और मुंबई को हिला कर रख देने वाला तूफान यह साबित करने के लिए काफी है कि मनुष्य प्रकृति के सामने कुछ नहीं है।

जिस तरह से मनुष्य प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करके, नदियों, पहाड़ों, वनों और प्राकृतिक संपदा के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और विकास की अंधी दौड़ में भाग रहा है, उससे तो मानव जीवन के अस्तित्व को खतरा ही पैदा होना है। अभी भी वक्त है कि आदमी संभल जाए। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ बंद करें।

’अनिल कौशिक, क्योड़क (कैथल)

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