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चौपाल: आसमानी आफत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार गरमी के मौसम के तुरंत बाद आने वाली मानसून की बारिश में आंधी, तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ी हुई गरमी की वजह से सबसे ज्यादा होती हैं। आंधी-तूफान की पूर्व सूचना देने वाली संस्था 'अर्थ नेटवर्क' की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2019 में आकाशीय बिजली गिरने की कुल तीन करोड़ बाईस लाख अड़तीस हजार छह सौ सड़सठ घटनाएं हुईं।

India Weatherदिल्ली एनसीआर में छाए बादल। (AP Photo)

हाल ही में अमेरिका की ‘साइंस’ मैगजीन में आकाशीय बिजली के बारे में एक बहुत ही चौंकाने वाली एक शोधपरक रिपोर्ट छपी है। इसके मुताबिक अगर मनुष्यजनित विभिन्न प्रदूषण से उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इस धरती के तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की भी बढ़ोतरी होती है, तो इस धरती पर आकाशीय बिजली गिरने की घटना में बारह प्रतिशत तक की वृद्धि हो जाएगी। नई दिल्ली स्थित पृथ्वी मंत्रालय द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले पैंसठ वर्षोंं (1951 से 2015 के बीच) भारत का वार्षिक औसत अधिकतम तापमान में 0.15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 0.13 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा संबंध आंधी-तूफान आने और आकाशीय बिजली गिरने की अधिकता से है।

मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थान ‘अर्थ नेटवर्क’ और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में बिजली गिरने की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि इसलिए हो रही है कि भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार की है कि वह भूमध्य रेखा और हिंद महासागर से बिल्कुल नजदीक है, जिससे इस पूरे महाद्वीप में भयंकर गरमी और अधिक आर्द्रता रहती है, जो आंधी-तूफान आने और आकाशीय बिजली गिरने के लिए सबसे जिम्मेदार कारक है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार गरमी के मौसम के तुरंत बाद आने वाली मानसून की बारिश में आंधी, तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ी हुई गरमी की वजह से सबसे ज्यादा होती हैं। आंधी-तूफान की पूर्व सूचना देने वाली संस्था ‘अर्थ नेटवर्क’ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2019 में आकाशीय बिजली गिरने की कुल तीन करोड़ बाईस लाख अड़तीस हजार छह सौ सड़सठ घटनाएं हुईं।

भारतीय मौसम विभाग के ‘इंडिया लाइटनिंग रिपोर्ट अर्थ नेटवर्क’ के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा बिजली गिरने की घटनाएं ओड़ीशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों की कुछ विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण होती है। भारत सरकार ने आकाशीय बिजली गिरने की पूर्व सूचना देने के लिए ‘दामिनी’ नामक एक ऐप भी जारी किया है, जिस पर मौसम विभाग आगामी प्राकृतिक खतरे को आगाह करते हुए पूर्व चेतावनी भी जारी करता रहता है। लेकिन सुदूर भारतीय गांवों में इस उपयोगी ऐप की अभी भी पहुंच नहीं हुई है!

आकाशीय बिजली से बचने के लिए कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मसलन, बारिश के दौरान बिजली के खंभों और उनके तारों, हरे पेड़ों और मोबाइल टॉवरों से दूर रहना चाहिए। अगर हम घर से कहीं बाहर फंस गए हैं तो आकाशीय बिजली से बचने के लिए हमें अपने हाथों से दोनों कानों को ढक कर दोनों एड़ियों को जोड़ कर तुरंत जमीन पर बैठ जाना चाहिए। एक साथ कई व्यक्ति हैं तो एक-दूसरे से दूरी बना लेनी चाहिए।

छतरी और सरिया हाथ में बिल्कुल नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ऐसी चीजों पर आकाशीय बिजली गिरने की सर्वाधिक संभावना होती है। पुआल या किसी ज्वलशील चीजों की ढेर के पास कभी खड़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि आकाशीय बिजली से इनमें भयंकर आग लगने की संभावना होती है। इस तरह की कुछ सावधानियों को बरतने से हमारा जीवन आकाशीय बिजली जैसी विपदा से सुरक्षित रह सकता है।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र

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