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यस बैंक ने लॉन्चिंग के 24 घंटे के भीतर ही टाल दिया 1 अरब डॉलर के शेयर बेचने की योजना

बीएसई पर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यस बैंक ने स्टॉक मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव और नई क्यूआईपी गाइडलाइन की गलत व्याख्या को अपनी इस योजना को टालने की वजह बताया है।

Author नई दिल्ली | September 9, 2016 12:19 PM
यस बैंक के सीईओ राणा कपूर।

यस बैंक को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट(क्यूआईपी) के जरिए 1 अरब डॉलर यानी 6600 करोड़ रुपए के फंड रैज़िंग(अनुदान संचयन) की अपनी योजना को मार्केट में अच्छा रिस्पॉन्स न मिलने के कारण रद्द करना पड़ा। बैंक की इस योजना को इनवेस्टर्स का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला और बैंक के शेयर प्राइस में गिरावट भी आ रही थी।

हालांकि, बैंक के एमएडी राणा कपूर ने नियमों का हवाला देते हुए अपनी इस योजना के फेल होने के पीछे मार्केट में ‘भारी उतार-चढ़ाव’ और इनवेस्टमेंट बैंकरों गोल्डमैन सैक्स, नोमुरा और सीएलएसए को जिम्मेदार ठहराया है। गोल्डमैन सैक्स, मोतीलाल ओसवाल और सीएलएसए इस इश्यू के ग्लोबल को-ऑर्डिनेटर्स थे। वहीं, एचएसबीसी, नोमुरा, इनवेस्टेक, इडलवाइज, जेएम फाइनेंशियल, इंगा कैपिटल, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और यस सिक्योरिटीज इस इश्यू के ज्वाइंट लीड मैनेजर्स थे।

बुधवार को किया था QIP का ऐलान: यस बैंक ने बुधवार को क्यूआईपी का ऐलान किया था। इसके जरिए बैंक की 6600 करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। बैंक ने इश्यू के लिए 1350 से 1410 रुपए का प्राइस बैंड तय किया था, जबकि स्टॉक 1330 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। बैंक की यह योजना साल 2016 की क्यूआईपी के जरिए फंड जुटाने की सबसे बड़ी योजना थी। इससे पहले जून, 2014 में यस बैंक ने क्यूआईबी के जरिए 2900 करोड़ रुपए जुटाए थे। इस साल अब तक क्यूआईपी के जरिए 5 कंपनियों ने 700 करोड़ रुपए जुटाए हैं।

बीएसई पर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यस बैंक ने स्टॉक मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव और नई क्यूआईपी गाइडलाइन की गलत व्याख्या को अपनी इस योजना को टालने की वजह बताया है। यस बैंक के मुताबिक मर्चेंट बैंकर की सलाह के बाद उसने यह फैसला किया है। गुरुवार के कारोबार के दौरान यस बैंक के स्टॉक में 7.7 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। जबकि, गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार पिछले 18 महीने की नई ऊंचाई पर बंद हुए।

ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में यस बैंक के सीईओ राणा कपूर ने कहा है कि बैंक के पास कम से कम अगले कुछ क्वॉर्टर्स की ग्रोथ के लिए पूंजी है और कुछ महीनों बाद इकनॉमिक ग्रोथ तेज होने पर बैंक फिर से शेयर बेचने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘शेयर प्राइस में काफी उतार-चढ़ाव हो रहा था। इनवेस्टर्स समझ नहीं पा रहे थे कि क्वॉलिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट यानी क्यूआईपी को ओ‌वरसब्सक्राइब होने के बाद भी अगले तीन व्पापारिक दिनों तक खुला रखना पड़ता है। मर्चेंट बैंकर्स की सलाह पर अमल करके हम फंस गए। अच्छे रिस्पॉन्स के बावजूद हमने क्यूआईपी को खुला रखा।’

आपको बता दें कि क्यूआईपी के जरिए कंपनियां निश्चित कीमतों पर खास निवेशकों को शेयर जारी करती हैं।
क्यूआईपी के जरिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर कंपनियों में निवेश करते हैं। वहीं, क्यूआईबी के अंतर्गत म्युचुअल फंड्स, विदेशी संस्थागत निवेशक आदि आते हैं।

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