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मणिपुर में कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा पुल बना रहा भारतीय रेलवे, दुनिया में होगी सबसे अधिक ऊंचाई

यह पुल 141 मीटर ऊंचाई पर बन रहा है, 34 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। एक तरह से यह पुल कुतुब मीनार से भी दोगुना ऊंचा होगा। यह यूरोप के मोन्टेनग्रो में बने 139 मीटर ऊंचे पुल का रिकॉर्ड तोड़ देगा।

railway bridgeमणिपुर में रेलवे बना रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल

भारतीय रेलवे की ओर से दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल पर काम चल रहा है। यह पुल पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से मणिपुर में तैयार किया जा रहा है, जो 111 किलोमीटर लंबे जिरिबाम-इम्फाल रेलवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह पुल 141 मीटर ऊंचाई पर बन रहा है, 34 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। एक तरह से यह पुल कुतुब मीनार से भी दोगुना ऊंचा होगा। यह यूरोप के मोन्टेनग्रो में बने 139 मीटर ऊंचे पुल का रिकॉर्ड तोड़ देगा। 703 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण इंफाल से 65 किमी दूर नोनी जिले के मरांगचिंग गांव में किया जा रहा है। इस पुल पर रेलवे की ओर से कुल 280 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। रेलवे ने इसे पूरा करने के लिए 2022 तक का टारगेट तय किया है।

इस पुल के पिलर्स को हाइड्रोलिक बरमों का इस्तेमाल कर तैयार किया जा रहा है। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक इस पुल के लिए स्टील के गर्डर्स को पहले से ही तैयार कर लिया गया है। इन्हें कोलकाता में तैयार किया जा रहा है और फिर उन्हें निर्माण स्थल पर भेजा जा रहा है। वहां इन्हें क्रेन की मदद से लगाया जाता है। यह पुल रेलवे की उस बड़ी लाईन का हिस्सा है, जिसका निर्माण उत्तर-पूर्व के राज्यों को शेष भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए किया जा रहा है।

इस पुल के अलावा रेलवे ने इस लाइन पर 147 अन्य पुलों का भी निर्माण किया है। इस रेलवे लाइन को पूरी करने के लिए 45 सुरंगे भी बनाई गई हैं‌। इसमें नार्थ-ईस्ट की सबसे लंबी रेलवे सुरंग भी है, जिसकी लंबाई 10.28 किमी है। शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने के लिए यह पुल बेहद अहम साबित होगा। इस लाइन के जरिए पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

बता दें कि बीते कुछ सालों में पूर्वोत्तर भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम हुआ है। 2017 में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रह्मपुत्र की सहायक लोहित नदी पर बने ढोला सदिया ब्रिज का उद्घाटन किया था। इस पुल का नाम संगीतकार भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया है, जो सदिया के ही रहने वाले थे। असम में तिनसुकिया ज़िले के सदिया में 2,056 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल 9.15 किलोमीटर लंबा है और मुंबई स्थित बांद्रा-वर्ली सी-लिंक से 3.55 किलोमीटर अधिक लंबा है। इसके जरिए भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्टर के मोर्चे पर तो बड़ी छाप छोड़ी ही है। इसके अलावा रणनीतिक और सामरिक लिहाज से भी बेहद अहम है। इस पुल के जरिए किसी भी समय सेना अरुणाचल प्रदेश से लगती चीन सीमा तक आसानी से पहुंच सकती है।

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