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भारत-पाकिस्तान कारोबार: दरवाजे बंद रहने से किसे नुकसान

हाल में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर कहा कि उनका देश दोनों के बीच तनाव कम करने को लेकर प्रयास करेगा।

(बाएं) अतुल भारद्वाज, फेलो, सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, निकिता सिंगला, विशेषज्ञ, कंसल्टिंग आर्गनाइजेशन ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स। फाइल फोटो।

हाल में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर कहा कि उनका देश दोनों के बीच तनाव कम करने को लेकर प्रयास करेगा। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के सऊदी अरब दौरे के बीच में यह टिप्पणी की। प्रिंस फैसल की टिप्पणी के साथ ही विश्व बैंक ने भारत और पाकिस्तान के बीच बंद कारोबार को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे पूरे दक्षिण एशिया के कारोबार पर असर पड़ रहा है।

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में गहरी चिंता जताई है। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 2019 से बंद है। कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के मारे जाने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान का तरजीही राष्ट्र (मोस्ट फेवर्ड नेशन, एमएफएन) का दर्जा छीन लिया और वहां से आयात होने वाली चीजों पर सीमा शुल्क दो सौ फीसद तक बढ़ा दिया। इसका प्रभाव इतना गंभीर था कि जनवरी से लेकर मार्च के बीच पाकिस्तान से होने वाला आयात 91 फीसद गिर गया। कारोबारी गिरावट का घाटा सिर्फ दोनों देशों में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

निर्भरता किस पर

पाकिस्तान की व्यापार के मामले में भारत पर थोड़ी अधिक निर्भरता देखने को मिलती है। संयुक्त राष्ट्र के ‘कॉमट्रेड’ के आंकड़ों के अनुसार, बीते 15 साल में भारत का दुनिया भर से आयात 5.2 लाख करोड़ डॉलर का था, लेकिन पाकिस्तान से सिर्फ 5.5 अरब डॉलर का ही आयात था। यह देश के कुल आयात का सिर्फ 0.1 फीसद था।

इसी समय में भारत से पाकिस्तान होने वाला निर्यात उसके कुल निर्यात का सिर्फ 0.7 फीसद था। किसी भी साल में भारत के कुल आयात में पाकिस्तान का हिस्सा 0.16 फीसद से अधिक नहीं रहा। वहीं, भारत के कुल निर्यात में उसका हिस्सा कभी 1.1 फीसद से आगे नहीं बढ़ पाया। दूसरी ओर, भारत से आयात में पाकिस्तान के कुल आयात का हिस्सा 3.6 फीसद रहा है, जबकि निर्यात 1.5 फीसद रहा है। इस दौरान पाकिस्तान के कुल आयात में भारत का हिस्सा 4.4 फीसद तक पहुंच गया, जबकि उसकी देश के कुल निर्यात में हिस्सेदारी 2.1 फीसद थी।

नुकसान किस तरह का

अप्रैल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते सुर्खियों में थे। पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने भारत के साथ दो साल से चले आ रहे एकतरफा प्रतिबंध को वापस लेने की बात उठा दी। हालांकि, पाकिस्तान की इमरान खान मंत्रिमंडल ने अगले ही दिन इस फैसले को पलट दिया।

कूटनीतिक तौर पर गेंद भारत ने पाकिस्तान के पाले में डाल रखी है। भारत कह चुका है कि वह व्यापार जारी रखने को तैयार है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को माहौल तैयार करना होगा। भारत और पाकिस्तान- दोनों देश बड़े व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, लेकिन दोनों देशों के कुछ उद्योग और बाजार एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। यही कारण है कि व्यापार पर रोक की मार दोनों तरफ भारी पड़ रही है।

क्या कहता है विश्व बैंक

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दोनों देश उच्च शुल्क, कठिन वीजा नीतियों और बोझिल प्रक्रियाओं को हटा देते हैं, तो दोनों देशों के बीच कारोबार दो अरब डॉलर से बढ़कर 37 अरब डॉलर का हो सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार 2019 से बंद है। कुछ समय पहले भारत ने पाकिस्तान का तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीन लिया है। वहां से आयात होने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क दो सौ फीसद बढ़ा दिया है।

भारत पर क्या असर

भारत की तीन मुख्य चीजों को छोड़कर पाकिस्तान पर खास निर्भरता नहीं है। हालांकि, इन वस्तुओं के लिए भारत पाकिस्तान पर निर्भर है। दिल्ली स्थित कंसल्टिंग आर्गनाइजेशन ब्यूरो आॅफ रिसर्च आॅन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार रद्द होने से भारत में छुहारों के खुदरा दामों में तीन गुना वृद्धि हुई है, क्योंकि वह इसके आयात के लिए पाकिस्तान पर निर्भर है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में भारत का खजूर और छुहारों का पाकिस्तान से आयात 40 फीसद था।

छुहारों का आंकड़ा 99.3 फीसद तक है। भारत ने जब पाकिस्तान के आयात पर 200 फीसद का शुल्क लगाया तो भारत में छुहारे आम उपभोक्ताओं के लिए महंगे हो गए। 2019-20 में भारत का पाकिस्तान से छुहारों का आयात सिर्फ 0.25 फीसद रह गया।
इसके अलावा, पाकिस्तान से सीमा साझा करने वाले भारतीय शहर अमृतसर में व्यापार रुकने के बाद सेंधा नमक के दाम दोगुने हो गए थे। 2018-19 में पाकिस्तान से भारत का सेंधा नमक का आयात 99.7 फीसद था, अगले साल यह घटकर 28 फीसद हो गया था। इसके अलावा सीमेंट और जिप्सम के आयात पर भी असर पड़ा है।

क्या कहते
हैं जानकार

यह सिर्फ दो देशों के बीच का मामला नहीं है। पूरे दक्षिण एशिया पर इसका कूटनीतिक असर हो रहा है। एक तरह से दुनिया शीत युद्ध जैसी स्थिति में जाती दिख रही है, जिसका केंद्र इस बार एशिया है।
– अतुल भारद्वाज, फेलो,
सिटी यूनिवर्सिटी आॅफ लंदन

भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार रुकने से अर्थव्यवस्था पर बेशक कम असर पड़ा है, लेकिन इसका मानवीय प्रभाव ज्यादा। दोनों ओर सीमा पर कई लोग अपनी आजीविका खो चुके हैं।
– निकिता सिंगला, विशेषज्ञ, कंसल्टिंग आर्गनाइजेशन ब्यूरो आॅफ रिसर्च आॅन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स

किन क्षेत्रों पर असर

दोनों देशों के बीच व्यापार रद्द होने से कुछ क्षेत्रों में काफी असर हुआ है। पाकिस्तान में जहां कपड़ा उद्योग और चीनी का बाजार प्रभावित हुआ है। वहीं, भारत में इसके कारण सीमेंट उद्योग, छुहारे और सेंधा नमक के बाजार पर असर पड़ा है। पाकिस्तान की भारत पर कपड़े और दवा उद्योग के कच्चे माल के लिए निर्भरता है।

पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है और उसके कुल आयात में इसकी भागीदारी 60 फीसद है। कपड़े के बाद चीनी उद्योग वहां सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है। कॉमट्रेड के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत से जितनी भी वस्तुओं का आयात किया, उनमें कपास का कुल हिस्सा 24 फीसद था। साल 2018 में पाकिस्तान भारत से नौ फीसद चीनी और चीनी के अन्य उत्पाद आयात करता था। व्यापार प्रतिबंध के बाद उसने ब्राजील, चीन और थाइलैंड से चीनी आयात करना शुरू कर दिया। चीनी की आपूर्ति कम हो गई और घरेलू बाजार में इसके दाम बढ़ गए।

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