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मध्य प्रदेश में सप्ताह में 72 घंटे मजदूरों से लिया जा सकेगा काम, शिवराज सरकार ने श्रम कानूनों में दी बड़ी ढील

कंपनियों और दुकानों की शुरुआत के लिए लाइसेंस हासिल करना और रजिस्ट्रेशन कराना बेहद आसान कर दिया गया है। अब किसी भी औद्योगिक इकाई को स्थापित करने के लिए सिर्फ एक ही दिन में लाइसेंस मिल सकेगा।

shivraj singhमध्य प्रदेश में मजदूरों से एक सप्ताह में 72 घंटे लिया जा सकेगा काम

कोरोना संकट के चलते अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के बीच मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने श्रम सुधारों की ओर से कदम बढ़ाते हुए कंपनियों के अधिकारों में इजाफा कर दिया है। अब सप्ताह में कर्मचारियों से मंजूरी लेकर 72 घंटे तक काम लिया जा सकेगा और उन्हें ओवरटाइम देना होगा। इसके अलावा श्रम कानूनों में ढील दी है ताकि औद्योगिक विवादों को कम से कम किया जा सके। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन सुधारों से प्रदेश में नए उद्योंगों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे निवेश के माहौल में सुधार आएगा और युवाओं को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवस मिल सकेंगे। शिवराज ने गुरुवार को श्रम कानूनों में ढील देने का फैसला लेने के बाद कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने इस तरह का कदम उठाया है।

इसके अलावा कंपनियों और दुकानों की शुरुआत के लिए लाइसेंस हासिल करना और रजिस्ट्रेशन कराना बेहद आसान कर दिया गया है। अब किसी भी औद्योगिक इकाई को स्थापित करने के लिए सिर्फ एक ही दिन में लाइसेंस मिल सकेगा। अब तक इसकी मियाद 30 दिन तक की थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में पहले से ही पब्लिक सर्विसेज डिलिवरी गारंटी ऐक्ट लागू है। इससे कंपनियों के रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया आसान हो सकेगी। यही नहीं देरी होने पर आवेदक को क्षतिपूर्ति भी की जाएगी।

इसके अलावा एक और बड़ा बदलाव करते हुए अब किसी भी फैक्ट्री के लाइसेंस को रिन्यू कराने के लिए 10 साल का वक्त होगा। अब तक के नियम के मुताबिक हर साल फैक्ट्री का लाइसेंस रिन्यू कराना होता था। लेबर कॉन्ट्रैक्ट लॉ के तहत राज्यों की ओर से अब कॉन्ट्रैक्ट की पूरी अवधि के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। अब तक यह एक वित्त वर्ष के लिए जारी किया जाता था। इसके अलावा 20 से कम कर्मचारियों के साथ काम करने वाले ठेकेदारों को पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।

यही नहीं प्रदेश सरकार ने केंद्र के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि इस संख्या को बढ़ाकर 50 तक कर दिया जाना चाहिए। यही नहीं रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जानी चाहिए। बता दें कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी तीन नियमों को छोड़कर सभी श्रम कानूनों को अगले तीन वर्ष तक के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है।

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