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बासमती : भारत के खिलाफ पाकिस्तान का कमजोर दावा

बासमती चावल के ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआइ) टैग’ को लेकर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की आपत्ति सामने आई है।

सांकेतिक फोटो।

बासमती चावल के ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआइ) टैग’ को लेकर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की आपत्ति सामने आई है। दरअसल, भारत ने अपने यहां पैदा होने वाले बासमती को जीआइ टैग देने के लिए वर्ल्ड ट्रेड आॅर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) के ‘अग्रीमेंट आॅन ट्रेड-रिलेटेड आस्पेक्ट्स आॅफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स’ (ट्रिप्स) के तहत आवेदन किया। इस बारे में 11 सितंबर 2020 को एक आधिकारिक जर्नल प्रकाशित हुआ। जर्नल प्रकाशित होने तक यूरोपीय देशों में भारतीय बासमती को टैग दिए जाने को लेकर आंतरिक मूल्यांकन हो चुका था।

यह खबर सामने आने पर बासमती के उत्पादक पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने कवायद शुरू की। बासमती वहां भी पैदा होता है। भारत के बासमती को जीआइ टैग मिलने से दुनियाभर में यही माना जाएगा कि असली और सबसे अच्छी गुणवत्ता का बासमती भारत में होता है। इससे पाकिस्तान का कारोबार प्रभावित होता। इन हालात में पाकिस्तान ने पांच अक्तूबर 2020 को एलान किया कि वह भारत के दावे का विरोध करेगा। सात दिसंबर 2020 को पाकिस्तान ने यूरोपीय समुदाय में भारतय के दावे पर आपत्ति जताई।

तब पाकिस्तान की परेशानी यह थी कि उनके यहां घरेलू स्तर पर जीआई टैग देने वाली संस्था नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवेदन देने से पहले उत्पाद को अपने देश में जीआई टैग मिलना जरूरी होता है। पाकिस्तान ने अपने यहां 2020 में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) ऐक्ट बनाया। फिर 27 जनवरी 2021 को बासमती चावल को जीआइ टैग दिया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने ईयू में अपने बासमती को जीआइ टैग देने के लिए आवेदन किया। उनका आवेदन 5 मार्च, 2021 को स्वीकार कर लिया गया था।

ईयू के निर्देशों के हिसाब से छह मई 2021 तक भारत और पाकिस्तान को ये मसला आपस में सुलझा लेना था। यह मियाद खत्म होने के बाद भारत ने आवेदन किया कि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है, तो इसके लिए तीन महीने का वक्त और दिया जाए। मार्च 2021 में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया था कि भारत ने 19 देशों में बासमती को जीआइ प्रमाणन के लिए आवेदन दिया है।

ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और केन्या में भारतीय बासमती को जीआइ पहचान और निशान मिल भी गया है। भारत में चावल का निर्यात 1990 के बाद तेज हुआ। पाकिस्तान का भी यही हाल है। दुनिया में जितना चावल होता है, उसकी 90 फीसद उपज और खपत एशिया में है। धान की पैदावार में भारत दुनिया में दूसरे और निर्यात करने में प्रथम है। एक दशक से भारत दुनिया में सबसे ज्यादा चावल निर्यात कर रहा है। पाकिस्तान भी 1990 के बाद से चावल निर्यात करनेवाले शीर्ष पांच देशों में लगातार बना हुआ है। दुनिया में बासमती पैदा करने वाले दो ही मुख्य देश हैं- भारत और पाकिस्तान। भारत दुनिया का करीब 65 फीसद बासमती निर्यात करता है, जबकि बचे हुए बाजार पर पाकिस्तान काबिज है। वर्ष 2019-20 में भारत ने कुल 44.5 लाख टन बासमती 31 हजार करोड़ रुपए में बेचा।

भारतीय कानून

भारत के बीज अधिनियम-1966 में बासमती की 29 किस्में दर्ज हैं। हालांकि, देशभर में करीब 33 तरह के बासमती किस्मे हैं। भारत सरकार की ‘एग्रीकल्चर ऐंड प्रॉसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी’ ने मई, 2010 में हिमालय के इर्द-गिर्द बसे सात राज्यों जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (26 जिले) को जीआइ टैग दिया था। इसके अलावा भी कई राज्यों में बासमती उगाया जाता है। मध्य प्रदेश में उगाए जा रहे बासमती को जीआइ टैग मिलने को लेकर काफी विवाद भी रहा। भारत से निर्यात होने वाला 80 फीसद बासमती पंजाब, हरियाणा में पैदा होता है।

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