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अजीम प्रेमजी 1.45 लाख करोड़ के साथ एशिया के सबसे बड़े दानी, विप्रो से हुई सारी कमाई दान

विश्व की सबसे बड़ी पांच राशियों में शुमार होने के साथ ही यह एशिया की सबसे बड़े दानी बन गए हैं। इस फैसले से 73 वर्षीय प्रेमजी का नाम विश्व के बड़े प्रभावशाली मानवतावादी बिल गेट्स, वॉरने बफेट और जॉर्ज सोरोस संग उनका नाम शुमार हो गया है।

अजीम प्रेमजी की इस घोषणा के बाद वह एशिया के सबसे बड़े दानी भी बन गए। (फोटो सोर्स- PTI)

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के उद्यमी एवं समाजसेवी अजीम प्रेमजी ने अपने एक फैसले से सबको चौंका दिया और साथ ही उनकी इस घोषणा से वह एशिया के सबसे बड़े दानी भी बन गए। भारत के सबसे उदार अरबपति, अजीम प्रेमजी परोपकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता एक बार फिर साबित करते हुए अपनी कंपनी के अतिरिक्त 34% शेयर को दान करने का फैसला किया है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जरिए उन्होंने अबतक कुल 1.45 लाख करोड़ रुपये (21 बिलियन डॉलर) दान कर चुके हैं।इसके साथ ही वह  एशिया के सबसे बड़े दानी बन गए हैं। इस फैसले से 73 वर्षीय प्रेमजी का नाम विश्व के बड़े प्रभावशाली मानवतावादी बिल गेट्स, वॉरने बफेट और जॉर्ज सोरोस संग उनका नाम शुमार हो गया है।

बुधवार को अजीम प्रेमजी ने घोषणा की कि वह कंपनी के शेयरहोल्डिंग का अतिरिक्त 34% परोपकार के लिए देंगे। इस हिसाब से 52,750 करोड़ रुपए की दान राशि बनती है जो अजीम प्रेम जी फाउंडेशन को ट्रांसफर की जाएगी।प्रेम जी की इस महानता को लेकर रोहिणी नीलेकणी ने कहा कि उनके ऐसा करने से सभी का लक्ष्य बढ़ गया है। बता दें कि नंदन नीलेकणी ने भी अपनी आधी संपत्ति दाने देने को कहा है। नीलेकणी ने कहा कि प्रेमजी ने जो किया है उसके लिए बड़ा दिमाग चाहिए। उनके ऐसा करने से वह वाकई भारतीय समाज में उपल्बध जटिल समस्यों के बारे में पता लगा पाएंगे और उनका समाधान भी बता पाएंगे। उनकी यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब भारत में समाजसेवी की स्थिति गंभीर है।

बेन एंड कंपनी द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 के बाद से भारत में दान देने वाले लोगों में कमी आई है। बेंगलुरू की कंपनी मोगुल के दान को छोड़ दें तो 10 करोड़ या उससे अधिक की आर्थिक मदद करने वाले लोगों में 2014 के बाद से 4 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं 50 मिलियम तक की संपत्ति वाले लोगों की संख्या 12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।बेन कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित चंद्रा का कहना है कि अजीम प्रेम जी दान की यह प्रवृत्ति जमशेदजी टाटा और डोराबजी टाटा से मिलती है।

बता दें कि  प्रेमजी का यह  फाउंडेशन बेंगलुरू में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी भी चलाता है। जल्द ही इस यूनिवर्सिटी को 5 हजार छात्रों और 400 शिक्षकों की क्षमता वाला बनाया जाएगा। इसके बाद उत्तर भारत में भी एक यूनिवर्सिटी खोलने की योजना है। वह उत्तर भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी सुधारना चाहते हैं। उनका फाउंडेशन कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों  में भी काम कर रहा है।

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