आज के समय में हर व्यक्ति चाहता है कि वह अपना रिटायरमेंट बिना किसी आर्थिक चिंता के सुकून के साथ व्यतीत करे। हालांकि, रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बिना नियमित नौकरी या आय के पैसे कितने समय तक चलेंगे। इसी सवाल का एक सरल और लोकप्रिय जवाब फाइनेंशियल प्लानिंग में दिया जाता है, जिसे “4% Rule” कहा जाता है। इसे दुनियाभर में रिटायरमेंट प्लानिंग का एक आसान और व्यावहारिक फॉर्मूला माना जाता है।
4% रूल क्या है?
इस नियम के अनुसार, अगर आपने रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाया है तो आप हर साल उससे लगभग 4% निकालकर खर्च कर सकते हैं। इससे आपका फंड लंबे समय तक (आमतौर पर 30 साल तक) चल सकता है।
इस नियम का मतलब यह है कि आपका पैसा निवेश में लगा रहता है और उस पर मिलने वाला रिटर्न आपकी निकासी को काफी हद तक संतुलित कर देता है।
इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है –
– मान लीजिए आपने रिटायरमेंट के लिए 2 करोड़ रुपये जमा किए हैं।
– 4% Rule के हिसाब से आप पहले साल निकाल सकते हैं
– 2 करोड़ × 4% = 8 लाख रुपये
यानी आप पहले साल लगभग 8 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं।
अगले साल आमतौर पर इस रकम को महंगाई के हिसाब से थोड़ा बढ़ाया जाता है।
कैसे बना यह नियम?
वित्तीय सलाहकार विलियम बेंजेन द्वारा 1990 के दशक में विकसित 4% नियम के अनुसार, रिटायर्ड व्यक्ति रिटायरमेंट के पहले वर्ष में अपनी कुल बचत का 4% निकाल सकते हैं और फिर प्रत्येक बाद के वर्ष में महंगाई के अनुसार उस राशि को समायोजित कर सकते हैं।
4% Rule कब काम नहीं कर सकता?
यह नियम हर परिस्थिति में यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता:
जल्दी रिटायरमेंट
अगर कोई व्यक्ति 40-50 वर्ष की उम्र में ही रिटायर हो जाता है, तो उसे अपने फंड को 30 वर्ष से भी अधिक समय तक चलाना होता है तो ऐसी स्थिति में 4% की निकासी दर ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है।
ज्यादा महंगाई
महंगाई अगर अनुमान से ज्यादा बढ़ती है, तो हर साल बढ़ाई गई निकासी आपके कुल फंड पर ज्यादा दबाव डालती है। इससे आपकी बचत जल्दी खत्म हो सकती है।
मार्केट में लंबी गिरावट
अगर लंबे समय तक वित्तीय संकट चलता है, तो आपके निवेश की वैल्यू कम हो सकती है। ऐसे में हर वर्ष तय 4% निकालना आपके फंड को जल्दी खत्म कर सकता है।
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सैलरी आते ही 50/30/20 के नियम को बजट बनाने का आसान और लोकप्रिय तरीका माना जाता है। यह नियम आपकी मंथली सैलरी को तीन हिस्सों में बांटकर खर्च और बचत को संतुलित करने में मदद करता है। इस नियम के अनुसार आपकी कमाई का 50% जरूरी खर्चों पर, 30% लाइफस्टाइल खर्चों पर और 20% बचत या निवेश के लिए रखा जाता है। यहां पढे़ं पूरी खबर…
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