भारत में डिजिटल पेमेंट्स के तेजी से बढ़ते दौर के बावजूद नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बढ़ती जरूरत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक दशक पुराने पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंकनोट के प्रस्ताव को फिर से जीवित कर दिया है।
केंद्रीय बैंक की हालिया बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि प्लास्टिक नोट मौजूदा कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होंगे और उनकी छपाई व रखरखाव की लागत भी कम पड़ सकती है।
भारत में अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट?
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में इस घटनाक्रम से जुड़े कई सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पॉलीमर या प्लास्टिक नोटों को शुरू करने के मुद्दे पर केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में चर्चा हुई थी, जो पटना और मुंबई में हुई थीं।
यह फैसला उत्पादन लागत में संभावित फायदों और ऐसे करेंसी नोटों की ज़्यादा शेल्फ लाइफ (लंबे समय तक चलने की क्षमता) को देखते हुए लिया गया है। आम लोगों के इस्तेमाल के लिए प्लास्टिक बैंकनोटों से जुड़ा एक पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही घोषित होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड की चर्चाओं से परिचित एक सूत्र ने कहा, “अभी इस्तेमाल हो रहे कागज़ी नोटों की तुलना में ऐसे नोटों की उत्पादन लागत में स्पष्ट फायदे हैं। इसके अलावा, ऑटोमेटेड टेलर मशीनें (ATMs) भी पॉलीमर-आधारित नोट निकालने में सक्षम हो जाएंगी। अब हमारे पास ऐसा करने के लिए ज़रूरी संसाधन मौजूद हैं।”
कागज के नोटों को छापने में कितना आता है खर्च?
FY25 की वार्षिक रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने बताया कि FY25 के दौरान कागजी करेंसी नोटों को सुरक्षित रूप से छापने पर 6,372.8 करोड़ का खर्च आया, जबकि पिछले साल यह खर्च 5,101.4 करोड़ रुपये था।
बैंकनोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाना जरूरी
प्लास्टिक बैंकनोट को अपनाना शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए एक जरूरी पहलू था, क्योंकि खराब हो चुके बैंकनोटों को नष्ट करने की दर काफी ज़्यादा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि FY25 में 23.8 अरब खराब बैंकनोट नष्ट किए गए, जो पिछले साल के 21.24 अरब नोटों की तुलना में 12.3 प्रतिशत ज़्यादा है।
दुनिया में कितने देशों में चलता है प्लास्टिक का नोट?
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में अब तक लगभग 60 ऐसे देश हैं जिन्होंने पॉलीमर से बने बैंक नोटों को चलन में लाया है। पॉलीमर नोट जारी करने वाला पहला देश ऑस्ट्रेलिया था, जिसने 1988 में दस डॉलर का नोट जारी किया था। इसके बाद थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी ऐसा ही किया।
यह भी पढ़ें: UPI से LPG तक… 1 जून से बदलने जा रहे ये 5 नियम
मई महीना खत्म होने और जून महीने की शुरुआत होने में कुछ दिन बाकी है। महीने की शुरुआत यानी 1 जून से कुछ महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इन बदलावों में गैस सिलेंडर की कीमतों, बैंकिंग सेवाओं, UPI पेमेंट, रेलवे और PAN कार्ड से जुड़े नियम शामिल है। जो आपकी जेब में सीधा असर हो पड़ सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में…
