क्या अब चाय बेचेंगे बाबा रामदेव? असम के टी रिसर्च इंस्टीट्यूट से हाथ मिलाने जा रही पतंजलि आयुर्वेद

Baba Ramdev की Patanjali Ayurved Ltd ने असम के एक टी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ गठजोड़ करने की घोषणा की है। इसके साथ ही पतंजलि असम में औषधीय खेती को भी बढ़ावा देने वाली है।

Baba Ramdev Chai
पतंजलि ने टी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ गठजोड़ की घोषणा की है। (Express Photo)

बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved Ltd) ने असम के एक टी रिसर्च इंस्टीट्यूट से गठजोड़ करने का हाल ही में ऐलान किया है। इस गठजोड़ की घोषणा के बाद से लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या अब बाबा रामदेव चाय भी बेचेंगे।

पतंजलि असम के जोरहाट जिले में स्थित टॉकलाई टी रिसर्च इंस्टीट्यूट (Tocklai Tea Research Institute) से हाथ मिलाने वाली है। इंस्टीट्यूट चाय की पत्तियों और बीजों पर शोध करने के लिए प्रसिद्ध है। अब इंस्टीट्यूट और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड मिलकर इस दिशा में शोध करेगी कि दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और स्वास्थ्य से संबंधित उत्पादों में चाय का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण (Patanjali Ayurved MD Acharya Balkrishna) ने इस सिलसिले में बीते सप्ताह असम के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी से मुलाकात की थी। इसके बाद ही टी रिसर्च इंस्टीट्यूट से हाथ मिलाने का ऐलान हुआ।

असम में औषधीय खेती को बढ़ावा देगी Patanjali Ayurved

बालकृष्ण ने यह भी बताया था कि उनकी कंपनी असम में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देगी। पतंजलि आयुर्वेद सोनितपुर और हरिद्वार स्थित प्लांट के लिए असम के किसानों से औषधीय उपज की खरीद भी करेगी।

आपको बता दें कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कई तरह के उत्पाद बनाती और बेचती है। इन उत्पादों में स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रकार के ड्रिंक भी शामिल हैं। आयुर्वेदिक उत्पादों के बाजार में पतंजलि आयुवेद का पहले से ही दबदबा है। इस सेगमेंट में पतंजलि की प्रतिस्पर्धा डाबर (Dabur), हिमालया (Himalaya), विक्को (Vicco) जैसे ब्रांडों है।

Patanjali Ayurved को नए उत्पादों से पुरानी रफ्तार पाने का यकीन

पतंजलि आयुर्वेद का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। पिछले वित्त वर्ष में पतंजलि आयुर्वेद का मुनाफा 22 प्रतिशत बढ़कर 423 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। हालांकि कंपनी के बढ़ने की रफ्तार इधर कुछ कम हुई है। पतंजलि का मुनाफा वित्त वर्ष 2014-15 में 86 प्रतिशत और 2015-16 में 100 प्रतिशत बढ़ा था। कंपनी नए उत्पाद पेश कर और मार्केटिंग की नई रणनीति अपनाकर पुरानी रफ्तार वापस पाने के प्रयास में है।

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टी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ गठजोड़ और औषधीय पौधों की खेती पर पतंजलि के जोर देने को इन्हीं प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा पतंजलि आयुर्वेद आक्रामक प्रचार की रणनीति अपनाने जा रही है। हाल ही में बाबा रामदेव ने बताया था कि पतंजलि के उत्पादों के प्रचार के लिए सिने अभिनेताओं और क्रिकेटरों आदि को ब्रांड एंबैसडर बनाया जा सकता है। अभी तक कंपनी के उत्पादों के विज्ञापनों में बाबा रामदेव ही मुख्य चेहरा रहे हैं।

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