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PPF में 5 तारीख से पहले निवेश करने में होता है फायदा, ऐसे समझें गणित

पीपीएफ बचत और निवेश के एक महत्वपूर्ण विकल्पों में एक है। यदि टैक्स बचाने या किसी अन्य कारण से पीपीएफ में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो आपको हर महीने की 5 तारीख से पहले निवेश करना चाहिए। पीपीएफ के नियमों के अनुसार इससे आपको अतिरिक्त ब्याज मिलता है।

पीपीएफ खाते में सालाना न्यूनतम 500 रुपये का निवेश 15 साल तक करना जरूरी है।

यदि आप नए वित्त वर्ष में टैक्स बचाने के लिए या सिर्फ निवेश के मकसद में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में निवेश कर रहे हैं तो आपको हर महीने की 5 तारीख से पहले ही निवेश कर देना चाहिए। पीपीएफ के नियमों के अनुसार पीपीएफ जमा पर ब्याज की गणना उस महीने की न्यूनतम राशि और 5 तारीख के बीच की राशि पर होता है।

इसलिए यदि आपको पीपीएफ की किस्त जमा करानी है तो उस महीने की 5 तारीख से पहले जमा करा दें। पीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की गणना हर महीने की जाती है जबकि ब्याज की राशि का भुगतान वित्तीय वर्ष के अंत में किया जाता है।  ईटी ऑनलाइन की खबर के अनुसार इसलिए यदि आप अपने पीपीएफ अकाउंट में एकमुश्त भी राशि जमा करते हैं तो आपका फाइनेंशियल एडवाइजर आपको इसे 5 अप्रैल से पहले राशि जमा करने की ही सलाह देगा।

इस तरह से आपको अधिकतम ब्याज मिल सकेगा। यदि आप हर महीने अपने पीपीएफ अकाउंट में पैसा जमा करते हैं तो भी आपको हर महीने की 5 तारीख से पहले ही राशि जमा करा देनी चाहिए। इस बात को इस तरह से समझा जा सकता है। माना की आपके पीपीएफ अकाउंट में 5 अप्रैल से पहले तक 1.5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि है।

सरकार की मार्च 2019 की अधिसूचना के अनुसार 8 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से ब्याज मिलेगा। अप्रैल महीने के ब्याज की गणना 5 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल की राशि पर की जाएगी। ऐसे में यदि आपने 5 अप्रैल से पहले 1.5 लाख रुपये जमा करा दिए हैं तो साल भर में कोई राशि जमा नहीं की है। ऐसे में आपको 8 फीसदी की दर से 1.5 लाख रुपये पर 1000 रुपये का ब्याज मिल जाएगा। एक तिमाही में ब्याज की दर समान रहने पर ब्याज की गणना के लिए यह राशि मई और जून में भी समान रहेगी।

दूसरी तरफ यदि आपने अपने अकाउंट में यह राशि 5 अप्रैल के बाद जमा कराई होती तो आपको अप्रैल महीने में यह ब्याज नहीं मिल पाता। यह अंतर भले ही आपको ज्यादा नहीं लग रहा हो लेकिन यदि आप पीपीएफ के 15 साल के लॉकइन पीरियड को देखेंगे तो यह अंतर दिखाई देगा। मान लें 15 साल की अवधि में 8 फीसदी की ब्याज दर रहती है। कैलकुलेशन से यह पता लगता है कि यदि व्यक्ति वित्तीय वर्ष शुरू होने के (5 अप्रैल से पहले) दौरान ही 1.5 लाख रुपये जमा कराता है तो उसे वित्तीय वर्ष के अंत में समान राशि जमा कराने व्यक्ति की तुलना में 3.6 लाख रुपये अधिक मिलेंगे।

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