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जानें, मुकेश अंबानी के हाथों फ्यूचर ग्रुप बेचने को कैसे मजबूर हुए रिटेल किंग किशोर बियानी, एक के बाद एक यूं फेल होते गए प्लान

किशोर बियानी कोर रिटेलिंग में अति-महत्वाकांक्षी हो गए थे। उन्होंने नाइबरहुड फार्मेट स्टोर जैसे easyday, nilgiris और heritage पर बहुत ध्यान दिया था पर वो कामयाब नहीं हो पाए।

जानें, कैसे संकट में घिरते गए रिटेल किंग कहे जाने वाले किशोर बियानी

कभी देश में रिटेल किंग कहे जाने वाले फ्यूचर ग्रुप के चीफ किशोर बियानी अपना पूरा साम्राज्य रिलायंस इंजस्ट्रीज लिमिटेड को बेचने जा रहे हैं। किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप की बातचीत मुकेश अंबानी के रिलायंस रिटेल से चल रही है ताकि फ्यूचर रिटेल को बेचकर कंपनी के बढ़ते कर्ज को चुका सकें। दोनों कंपनी विभिन्न नियम एवं शर्तों को लेकर एक समझौते पर पहुंची हैं और जल्द ही 24,000-27,000 करोड़ की डील पर साइन हो सकते हैं। यह डील रिलायंस रिटेल को फैशन, ग्रॉसरी व्यापार का सबसे बड़ा प्लेयर बना देगा और इसके साथ ही बियानी रिटेल सेक्टर से बेदखल हो जाएंगे। कर्ज के संकट में फंसे किशोर बियानी की स्थिति को इससे समझा जा सकता है कि यदि कोविड-19 के चलते सरकार की ओर से डिफॉल्टर से कर्ज में छूट और नए दिवालिया केसों का सस्पेंशन ना किया जाता तो आज उनकी कंपनी दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही होती। आइए जानते हैं, कैसे मुकेश अंबानी को अपना कारोबार बेचने पर मजबूर हुए किशोर बियानी…

लगातार बढ़ता गया कर्ज: फ्यूचर ग्रुप ने बीते कई सालों में लगातार कर्ज लिया है। 30 सितंबर 2019 को फ्यूचर ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कर्ज बढ़कर 12,778 करोड रुपए हो गया था, जो 31 मार्च 2019 को 10,951 करोड रुपए था। उसके पास कुछ ड्यूज पेमेंट करने के लिए मार्च तक की डेडलाइन ही थी, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रोक ने फ्यूचर ग्रुप को थोड़ी राहत दे दी। फरवरी 2020 के मध्य में बियानी के कर्ज ना उतार पाने की क्षमता की बात मार्केट में होने लगी, जिसके बाद कंपनी के शेयर तेजी से नीचे गिरने लगे। इसके बाद कर्जदाता लोन के बदले बियानी से ज्यादा शेयर मांगने लगे।

कोरोना काल में बंद हुए कई स्टोर्स: इस बीच कोरोना के संकट ने एक तरफ कंपनी को कर्ज चुकाने के लिए कुछ मोहलत दी तो दूसरी तरफ कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ और तमाम स्टोर ही कंपनी को बंद करने पड़ गए। नकदी की बढ़ती कमी ने कंपनी को कर्ज पर डिफॉल्ट होने के लिए मजबूर कर दिया।

बुरी तरह फेल रहे बियानी के ये प्लान:  किशोर बियानी कोर रिटेलिंग में अति-महत्वाकांक्षी हो गए थे। उन्होंने नाइबरहुड फार्मेट स्टोर जैसे easyday, nilgiris और heritage पर बहुत ध्यान दिया था पर वो कामयाब नहीं हो पाए। बियानी ने इन वेंचर्स पर भारी निवेश किया था पर उन्हें यहां कामयाबी नहीं मिली। बियानी ने अपने 2000 करोड रुपए के बिजनेस को 2021 तक 20,000 करोड़ तक पहुंचाने की सोची थी।  पर कंपनी को घाटा उठाने पड़ा और वित्तवर्ष 2020 के पहले 9 महीनों में उसका लाभ 11.24% घटकर 619 करोड़ रूपए रह गया।

फीके पड़े फ्यूचर ग्रुप के ब्रांड्स: दरअसल फ्यूचर ग्रुप में 35-40% व्यापार उसके अपने ब्रांड्स के कारण होता था, जो बाद में ग्राहकों को आकर्षित करने में नाकामयाब रहे। इससे कंपनी को भारी नुकसान पहुंचा। मैन ऑफ द आइडियाज कहे जाने वाले किशोर बियानी अपने कई आइडियाज जमीन पर लागू करने में नाकामयाब रहे। बियानी का कर्ज के साथ जूझने का पुराना इतिहास रहा है। वित्त वर्ष 2012 में उनपर 12,000 करोड रुपए का कर्जा हो गया था फिजानें, मुकेश अंबानी के हाथों फ्यूचर ग्रुप बेचने को कैसे मजबूर हुए किशोर बियानी
र उन्हें अपनी वैल्यूबल संपत्ति पैंटालून रिटेल को आदित्य बिरला ग्रुप के हाथों 1,600 करोड रुपए में बेचने पर मजबूर होना पड़ा था।

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