भारत में डिजिटल भुगतान की बात हो तो सबसे पहले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface -UPI) का नाम आता है। यह एक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जो आपके कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल एप्लिकेशन (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm आदि) में जोड़ता है। जिसके जरिए आसानी से भुगतान किया जा सकता है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के इस प्लेटफॉर्म ने देश में डिजिटल लेनदेन को आसान बना दिया है। UPI के व्यापक उपयोग के बीच RBI डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि दोनों में क्या अंतर है और केंद्रीय बैंक डिजिटल रुपये पर इतना जोर क्यों दे रहा है।
समाचार एजेंसी Reuters की हाल ही की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में RBI Digital Rupee के उपयोग को सरकारी योजनाओं और सीमा-पार भुगतान जैसे क्षेत्रों तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
क्या है Digital Rupee?
RBI के CBDC Concept Note के अनुसार, डिजिटल रुपया या ई-रुपी भारत की Central Bank Digital Currency (CBDC) है। यह केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा है और इसकी वैल्यू भौतिक रुपये (नोट और सिक्कों) के बराबर होती है।
RBI के मुताबिक, डिजिटल रुपया एक लीगल टेंडर है यानी इसे भुगतान के वैध माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। यह नकदी का डिजिटल रूप है, जिसे केंद्रीय बैंक जारी करता है।
क्या है यूपीआई और डिजिटल रुपया में अंतर?
यूपीआई एक भुगतान प्रणाली है, जो बैंक खातों के बीच पैसे के लेन-देन की सुविधा देती है। जब कोई व्यक्ति यूपीआई के जरिए भुगतान करता है, तो राशि एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में जाती है।
वहीं डिजिटल रुपया खुद मुद्रा है, जिसे आरबीआई जारी करता है। इसे डिजिटल वॉलेट में रखा जा सकता है और इसका मूल्य नकद रुपये के बराबर होता है।
RBI Digital Rupee को क्यों बढ़ावा दे रहा है?
29 मई 2026 की Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि वह कल्याणकारी भुगतानों में डिजिटल रुपये के उपयोग को और अधिक बढ़ाने और सीमा पार लेनदेन में इसके उपयोग का परीक्षण करने की योजना बना रहा है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत डिजिटल रुपये के उपयोग को व्यापक बनाने और विदेशी भुगतानों में इसकी भूमिका तलाशने की कोशिश कर रहा है।
आरबीआई ने कहा कि उसने वित्त वर्ष 25/26 के दौरान कई कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा पायलट प्रोजेक्ट चलाए, जिनमें गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जहां लाभार्थियों को डिजिटल रुपये के माध्यम से खाद्य सब्सिडी प्राप्त हुई।
आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा, “संस्थागत स्तर पर, कई सरकारी एजेंसियों ने सार्वजनिक धन के उत्पादक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सीबीडीसी की प्रोग्रामेबिलिटी सुविधा का लाभ उठाते हुए विभिन्न प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं में पायलट परियोजनाएं शुरू कीं।”
अप्रैल में रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि भारत देश भर में कम से कम दस सीबीडीसी पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है ताकि यह परीक्षण किया जा सके कि क्या ई-रुपये का उपयोग कल्याणकारी भुगतानों को अधिक कुशलता से वितरित करने के लिए किया जा सकता है।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
