Explained: सरकार द्वारा हाल ही में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में हिस्सेदारी बेचने के लिए Offer for Sale (OFS) का इस्तेमाल किए जाने के बाद यह शब्द एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन क्या ओएफएस वही प्रक्रिया है, जिसे आईपीओ या एफपीओ कहा जाता है? या फिर ये सभी अलग-अलग तरीके हैं?
अगर आप शेयर बाजार या सरकारी विनिवेश से जुड़ी खबरें पढ़ते हैं, तो इन चारों शब्दों का मतलब जानना जरूरी है। इस एक्सप्लेनर में समझिए ओएफएस, आईपीओ, एफपीओ और विनिवेश के बीच अंतर और सरकार किस स्थिति में कौन-सा तरीका अपनाती है…
क्या होता है ऑफर फॉर सेल?
ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस एक ऐसा तरीका होता है, जिसमें पहले से शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक अपने मौजूदा शेयर स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से निवेशकों को बेचते हैं।
इसमें कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करती। इसलिए ओएफएस से मिलने वाला पैसा कंपनी के पास नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर या सरकार के पास जाता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने साल 2012 में लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों के लिए OFS का स्ट्रक्चर पेश किया था। सरकार भी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करती है।
क्या होता है आईपीओ?
आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफर किसी कंपनी की शेयर बाजार में पहली एंट्री होती है। आसान भाषा में समझें तो जब कोई अनलिस्टेड कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों को खरीदने के लिए पेश करती है और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती है, तो इस प्रक्रिया को IPO कहा जाता है।
क्या होता है एफपीओ?
Further Public Offer (FPO) केवल पहले से लिस्टेड कंपनी ला सकती है। जब ऐसी कंपनी विस्तार, कर्ज चुकाने या अन्य जरूरतों के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाना चाहती है, तो वह नए शेयर जारी कर FPO लाती है।
क्या होता है विनिवेश?
विनिवेश (Disinvestment) वह प्रक्रिया है, जिसमें केंद्र सरकार किसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा बेचती है। इसके लिए सरकार OFS, IPO, Strategic Sale या अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर सकती है।
इसका मतलब है कि विनिवेश एक व्यापक नीति है, जबकि OFS, IPO और अन्य तरीके उस नीति को लागू करने के अलग-अलग माध्यम हैं।
चारों में क्या अंतर है?
| तरीका | कब इस्तेमाल होता है? | पैसा किसे मिलता है? |
|---|---|---|
| OFS | सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा शेयर बेचे जाते हैं | शेयर बेचने वाले प्रमोटर/सरकार को |
| IPO | कंपनी पहली बार शेयर बाजार में आती है | कंपनी को |
| FPO | सूचीबद्ध कंपनी नए शेयर जारी करती है | कंपनी को |
| Disinvestment | सरकार PSU में हिस्सेदारी कम करती है | सरकार को |
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किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।
आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…
