देश की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की एक अहम भूमिका है। बैंकिंग, बीमा, ट्रांसपोर्ट, टेलीकॉम और दूसरी सेवाएं आर्थिक गतिविधियों का अहम हिस्सा हैं।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के मुताबिक, सर्विस सेक्टर 2013-14 से देश के ग्रोस वैल्यू एडेड (GVA) में 50% से ज्यादा योगदान देता आ रहा है।
इसके बावजूद सर्विस सेक्टर के उत्पादन में कम समय के भीतर होने वाले बदलाव को मापने के लिए देश में कोई व्यापक हाई-फ्रीक्वेंसी इंडेक्स नहीं था।
अब MoSPI इस कमी को दूर करने के लिए इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) लाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य सर्विस सेक्टर के उत्पादन में समय के साथ होने वाले बदलाव को मापना है। ऐसे में सवाल उठता है कि आईएसपी इंडेक्स क्या है, भारत इसे क्यों ला रहा है ? आइए आसान भाषा में समझते हैं…
क्या है आईएसपी इंडेक्स?
इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन एक शॉर्ट-टर्म इंडिकेटर है, जिसे एक तय बेस पीरियड की तुलना में सर्विस सेक्टर द्वारा किए गए उत्पादन की मात्रा में समय के साथ होने वाले बदलावों को मापने के लिए तैयार किया गया है। यह समय के साथ सर्विस देने वाली इंडस्ट्रीज के वास्तविक उत्पादन में होने वाले बदलावों को मापता है।
क्यों ला रहा है भारत नया आईएसपी इंडेक्स?
MoSPI के मुताबिक, सर्विस सेक्टर 2013-14 से भारत के GVA में 50% से ज्यादा योगदान देता आ रहा है। इसके बढ़ते महत्व को देखते हुए एक ऐसे शॉर्ट-टर्म इंडिकेटर की जरूरत है, जो सर्विस सेक्टर के उत्पादन में होने वाले बदलाव की नियमित जानकारी दे सके।
आईएसपी का उद्देश्य सर्विस सेक्टर की ग्रोथ को कम समय के अंतराल पर मापना और हाई-फ्रीक्वेंसी जानकारी उपलब्ध कराना है। MoSPI के FAQ के मुताबिक, यह इंडेक्स अर्थव्यवस्था की शॉर्ट-टर्म गतिविधियों को समझने में आईआईपी को पूरक जानकारी भी देगा।
सर्विस सेक्टर का उत्पादन कैसे मापा जाएगा?
पीआईबी के अनुसार, हालांकि सर्विस सेक्टर के उत्पादन को मापना आसान नहीं है। पीआईबी के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग में उत्पादन को अक्सर बनाए गए सामान की भौतिक मात्रा से मापा जा सकता है, जबकि सेवाएं काफी हद तक अमूर्त होती हैं और कई सेवा गतिविधियों के उत्पादन को सीधे मापना संभव नहीं होता।
इसी वजह से ISP में अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। कुछ क्षेत्रों में मात्रा-आधारित संकेतक के जरिए भौतिक मात्रा के आधार पर उत्पादन मापा जाएगा। उदाहरण के लिए, एयर ट्रांसपोर्ट में पैसेंजर-किलोमीटर जैसे संकेतक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं अन्य सेवाओं में रेवेन्यू, सेल्स या बाहरी आपूर्ति जैसे मूल्य-आधारित संकेतकों का इस्तेमाल होगा।
जहां उपयुक्त डेटा उपलब्ध होगा, वहां टर्नओवर को संबंधित प्राइस इंडेक्स से Deflate किया जाएगा। यानी कीमतों में बदलाव का असर हटाकर सेवाओं के वास्तविक उत्पादन में हुए बदलाव को मापने की कोशिश की जाएगी।
कहां से आएगा आईएसपी के लिए डेटा?
MoSPI के दस्तावेजों के मुताबिक, आईएसपी तैयार करने के लिए अलग-अलग डेटा स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें Administrative या सेकेंडरी डाटा, जीएसटी डाटा और Annual Survey of Incorporated Services Sector Enterprises (ASISSE) जैसे स्रोत शामिल हैं।
एयर ट्रांसपोर्ट, रेलवे ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों के लिए Administrative या सेकेंडरी डाटा का इस्तेमाल प्रस्तावित है। कई अन्य सेवा क्षेत्रों के लिए जीएसटी डेटा महत्वपूर्ण स्रोत होगा। हेल्थ और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों को बाद में ASISSE डेटा के आधार पर शामिल करने की योजना है, जिसमें सरकारी योगदान शामिल नहीं होगा।
आईएसपी में किन सेवाओं को शामिल करने की योजना है?
MoSPI की योजना ओवर ऑल डाटा के साथ Sub-Sectoral Indices भी ट्रायल आधार पर जारी करने की है।
इसके खंड में थोक और खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, होटल और रेस्तरां, रियल एस्टेट, व्यावसायिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं और कला, मनोरंजन और मनोरंजन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
हेल्थ और एजुकेशन को बाद में आईएसपी फ्रेमवर्क में शामिल करने की योजना है।
क्या पूरा सर्विस सेक्टर आईएसपी में शामिल होगा?
नहीं। MoSPI के मुताबिक, आईएसपी मुख्य रूप से औपचारिक सेवा क्षेत्र को दिखाएगा। इसका एक कारण यह है कि कई क्षेत्रों के लिए जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड इकाइयों की Outward Supplies का इस्तेमाल किया जाएगा।
लोक प्रशासन और रक्षा, बैंकिंग और बीमा के अलावा कुछ अन्य वित्तीय सेवाएं, व्यक्तिगत सेवाएं, निजी घरों की गतिविधियां, सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं तथा कुछ अन्य क्षेत्र इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
आईएसपी का बेस ईयर क्या होगा?
ट्रायल आईएसपी के लिए 2024-25 को बेस ईयर चुना गया है। MoSPI के मुताबिक, यह वर्ष Recency और नॉर्मल ईयर के मानकों को पूरा करता है।
मंत्रालय ने यह भी बताया है कि ज्यादातर सब-सेक्टर्स के लिए सीपीआई आधारित Deflators इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है और नई सीपीआई सीरीज का बेस 2024 है। इस आधार पर 2024-25 को ISP के लिए उपयुक्त बेस ईयर माना गया है।
आईएसपी कब जारी होगा?
MoSPI के FAQ के मुताबिक, 2025-26 के ट्रायल मासिक सूचकांक और अप्रैल 2026 का इंडेक्स 14 जुलाई 2026 को जारी करने की योजना है।
इसके बाद ट्रायल मासिक सूचकांक को लगभग 60 दिनों के अंतराल के साथ हर महीने की 29 तारीख को जारी करने की योजना है। अगर उस दिन छुट्टी होगी तो रिलीज अगले वर्किंग डे पर की जाएगी।
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