अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दवा बनाने का काम वापस अमेरिका में लाना है।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से भारत को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि वह अमेरिका को जेनेरिक दवाएं एक्सपोर्ट करने वाला सबसे बड़ा देश है।

ट्रंप ने क्या ऐलान किया?

डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि 1 अगस्त से अमेरिका में आने वाली जेनेरिक दवाओं पर दो साल तक जीरो परसेंट टैरिफ लगेगा। इसके बाद, एक साल के लिए टैरिफ बढ़कर 100% हो जाएगा और फिर तीसरे साल से यह 200% हो जाएगा।

ट्रंप ने कहा कि इस प्लान का मकसद जेनेरिक दवाओं का प्रोडक्शन वापस अमेरिका में लाना है, और “जो कंपनियां तय समय के अंदर प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी का उद्देश्य अमेरिका के लोगों की सुरक्षा करना है और पेटेंट वाली, ब्रांडेड और नई दवाओं के लिए मौजूदा तरीका वैसा ही रहेगा।

क्या भारतीय निर्यात खतरे में है?

समाचार एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अक्सर “दुनिया की फ़ार्मेसी” कहा जाता है क्योंकि वह दुनिया भर में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं की सप्लाई करता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की रिपोर्ट (जिसका जिक्र PTI ने किया है) के अनुसार, 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर (लगभग 93,500 करोड़ रुपये) की दवाएं एक्सपोर्ट कीं।

यह भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के ग्लोबल फ़ार्मा एक्सपोर्ट का 38 परसेंट था। भारतीय जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, कैंसर, संक्रामक बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

दलाल स्ट्रीट पर तुरंत दिखा इस ऐलान का असर

भारत का निफ्टी फार्मा इंडेक्स बुधवार को शुरुआती कारोबार में लगभग 2% गिर गया, जबकि रॉयटर्स ने इस गिरावट को 1.6% बताया क्योंकि निवेशक ने टैरिफ के चरणों वाले स्ट्रक्चर पर विचार किया। सन फ़ार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, ल्यूपिन और अरबिंदो फ़ार्मा जैसी बड़ी एक्सपोर्टर कंपनियों के शेयर 2 से 2.5% तक गिर गए।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ब्रॉडर मार्केट में भी गिरावट आई; निफ्टी 50 में 0.41% और BSE सेंसेक्स में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई।

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