जानें, क्यों गौतम अडानी की कंपनियों को हो रहा लगातार घाटा, मोदी सरकार के माने जाते रहे हैं करीबी

अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज के रेवेन्यू में जून तिमाही में 50 पर्सेंट तक की गिरावट देखने को मिली है। इस तिमाही में कंपनी को कुल 5,265.19 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है, जो बीते साल की इसी तिमाही के मुकाबले 50 फीसदी कम है।

gautam adani
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कारोबारी गौतम अडानी

नए दौर के सफल कारोबारियों में शुमार किए जाने वाले गौतम अडानी की कंपनियां इन दिनों घाटे के दौर से गुजर रही हैं। अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज को जून तिमाही में 66.57 करो़ड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि बीते साल की इसी अवधि में कंपनी को 570.14 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट हुआ था। इसके अलावा अडानी इंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी अडानी पावर को जून तिमाही में 682.46 करोड़ रुपये का नेट लॉस उठाना पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में इसी तिमाही में कंपनी का नेट लॉस 263.39 करोड़ रुपये था। आइए जानते हैं, क्यों घाटे में जा रही हैं अडानी की कंपनियां…

अडानी ग्रुप का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में देश भर में बिजली की मांग प्रभावित होने से उसकी आय में कमी आई है और उसकी बिजली कंपनी का घाटा बढ़ा है। अडानी पावर ने बंबई शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसकी आय 2020-21 की पहली तिमाही में घटकर 5,356.19 करोड़ रुपये रही जो एक साल पहले 2019-20 की इसी तिमाही में 8,014.50 करोड़ रुपये थी। कंपनी को 2019-20 में एकीकृत रूप से 2,274.77 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। जबकि आय 27,841.81 करोड़ रुपये थी।

अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज के रेवेन्यू में जून तिमाही में 50 पर्सेंट तक की गिरावट देखने को मिली है। इस तिमाही में कंपनी को कुल 5,265.19 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है, जो बीते साल की इसी तिमाही के मुकाबले 50 फीसदी कम है। कंपनी का कहना है कि कोरोना संकट के चलते उसके ऑपरेशंस प्रभावित हुए हैं और उसका असर तिमाही नतीजों में देखने को मिला है। पोर्ट से लेकर बिजली तक के काम में दखल रखने वाले अडानी ग्रुप को यह घाटा होना चिंताएं बढ़ाने वाला है।

नई रणनीति न अपनाने से पिछड़ रहा कारोबार: मार्केट के जानकारों के मुताबिक अडानी ग्रुप के कोरोना संकट से प्रभावित होने की वजह यह भी है कि समूह मुख्य तौर पर पारंपरिक कारोबारों से जुड़ा है। रिलायंस की तरह मोदी सरकार के करीबी माने जाने वाले अडानी समूह ने नई तकनीक में निवेश के जरिए कारोबार को आगे नहीं बढ़ाया है। इसके चलते कंपनी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि कोरोना काल में अधिकतर परंपरागत कारोबारों को नुकसान हुआ है, जबकि ऑनलाइन बिजनेस में ग्रोथ देखने को मिली है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह को कोरोना काल में मिली ग्रोथ की वजह भी रिलायंस जियो जैसी नई तकनीक वाली कंपनी ही है।

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