Explained: पश्चिम एशिया में जब भी युद्ध, हमले या तनाव बढ़ने की खबर आती है, तो भारत में सबसे पहले कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों पर नजर टिक जाती है। टीवी चैनलों से लेकर शेयर बाजार तक हर जगह तेल की चर्चा होने लगती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किमी दूर हो रही घटनाओं का भारत से आखिर क्या लेना-देना है?
दरअसल, इसका रिश्ता सिर्फ पेट्रोल और डीजल के दाम से नहीं है। तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव धीरे-धीरे आम लोगों की जेब तक पहुंचता है। महंगाई बढ़ सकती है, सामान ढोने का खर्च बढ़ सकता है और कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। आखिर ऐसा क्यों होता है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ते ही भारत के लिए तेल सबसे बड़ी चिंता क्यों बन जाता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं…
भारत के लिए तेल इतना अहम क्यों है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता और आयातक है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में भारत की क्रूड ऑयल इम्पोर्ट डिपेंडेंसी 88.6% रही।
पश्चिम एशिया तनाव का भारत से क्या रिश्ता?
भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 55% पश्चिम एशिया से खरीदता है। वहीं एलएनजी का बड़ा हिस्सा भी कतर, यूएई और ओमान जैसे देशों से आता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का भू-राजनीतिक तनाव भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा बन जाता है।
इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज जलडमरूमध्य?
पश्चिम एशिया से निकलने वाला अधिकांश तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है। इस मार्ग में व्यवधान आने पर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतें दोनों प्रभावित होती हैं। हाल में रास्ता दोबारा खुलने से आपूर्ति सुधरी, लेकिन तनाव बढ़ने पर फिर जोखिम पैदा हो गया।
तेल महंगा होने से आपकी जेब पर कैसे असर पड़ता है?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। इससे महंगाई से लेकर हवाई किराए और आपकी रोजमर्रा की जेब तक कई चीजें प्रभावित हो सकती हैं।
- परिवहन: ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने लगती है।
- रोजमर्रा का सामान महंगा: खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामान की ढुलाई महंगी होने से कीमतें बढ़ सकती हैं।
- हवाई किराया: विमान ईंधन (ATF) महंगा होने से एयर टिकट महंगे हो सकते हैं।
- महंगाई का दबाव: तेल महंगा होने से कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
क्या भारत के पास कोई सुरक्षा कवच है?
हां। भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं। भारत के मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तीन प्रमुख स्थानों पर बने हुए हैं।
– Visakhapatnam – 1.33 मिलियन टन क्षमता
– Mangaluru – 1.5 मिलियन टन क्षमता
– Padur – 2.5 मिलियन टन क्षमता
इन तीनों भंडारों की कुल क्षमता करीब 5.33 मिलियन टन है। सरकार के अनुसार, पूरी क्षमता पर भरे होने की स्थिति में अकेले SPR देश की करीब 9.5 दिनों की कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
