HDFC Bank के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा बैंक की टॉप लीडरशिप के भीतर चल रहे गंभीर मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चक्रवर्ती का पद छोड़ना बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन के साथ लंबे समय से चले आ रहे अंदरूनी टकराव का नतीजा लगता है।
अतनु चक्रवर्ती (जो 2021 से नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे) ने पिछले हफ्ते बिना किसी पहले से चेतावनी के पद छोड़ दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में अपने और बैंक की लीडरशिप के बीच नैतिक आधार पर गंभीर मतभेदों की ओर इशारा किया, जिससे पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में सवाल उठ रहे थे।
HDFC बैंक में गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी के चेयरमैन को लिखे अपने लेटर में, चक्रवर्ती ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने कुछ ऐसे डेवलपमेंट और अंदरूनी तरीके देखे जो उनके पर्सनल वैल्यू और नैतिक स्टैंडर्ड से मेल नहीं खाते थे, जिसकी वजह से आखिरकार उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
CEO जगदीशन की दोबारा नियुक्ति – क्या अतनु के जाने की वजह?
अतनु के अचानक जाने से निवेशकों और इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों के बीच बैंक की स्टेबिलिटी को लेकर चिंता बढ़ गई। हालांकि, मामले की जानकारी रखने वालों ने FT को बताया कि यह मामला कम्प्लायंस से जुड़ी असहमतियों से कहीं ज्यादा गहरा था।
FT के अनुसार, बैंक के CEO जगदीशन के दोबारा अपॉइंटमेंट के सवाल को लेकर मामला और बिगड़ गया। उनका मौजूदा टर्म खत्म होने वाला है और रिन्यूअल के लिए रेगुलेटरी क्लीयरेंस की जरूरत है। रिपोर्ट बताती है कि चक्रवर्ती जगदीशन का टर्म बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे, जबकि बोर्ड के ज्यादातर सदस्यों ने CEO के बने रहने का समर्थन किया था।
एफटी की रिपोर्ट में मुंबई के एक सीनियर बैंकिंग एग्जीक्यूटिव का हवाला देते हुए कहा गया है कि चेयरमैन ने जगदीशन का टर्म रिन्यू करने के खिलाफ साफ स्टैंड लिया था। मामले से जुड़े एक और करीबी व्यक्ति ने कहा कि इस मुद्दे पर असहमति ही इस झगड़े की मुख्य वजह लगती है।
दोनों लीडर्स के बीच मतभेद नए नहीं
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दोनों लीडर्स के बीच मतभेद नए नहीं थे और कुछ समय से बन रहे थे। एक बड़ा मुद्दा बैंक की एक अहम ब्रांच, HDB फाइनेंशियल सर्विसेज का भविष्य था। जगदीशन ने 2024 में सब्सिडियरी में माइनॉरिटी स्टेक मित्सुबिशी UFJ फाइनेंशियल ग्रुप को बेचने के आइडिया का सपोर्ट किया था।
हालांकि, चक्रवर्ती इस कदम के खिलाफ थे। इस प्रपोजल पर असहमति ने दोनों के बीच तनाव बढ़ा दिया और आखिरकार डील नहीं हो पाई। इसके बजाय, पिछले वर्ष बिजनेस को पब्लिक कर दिया गया।
एक शेयरहोल्डर ने FT को बताया कि बैंक के टॉप मैनेजमेंट में काफी समय से साफ मतभेद थे, जिससे पता चलता है कि चेयरमैन का जाना अंदर ही अंदर चल रहे तनाव का नतीजा था।
मिस्त्री ने किया अंदरूनी झगड़े से इनकार
चक्रवर्ती के पद छोड़ने के एक दिन बाद, केकी मिस्त्री (जो HDFC बैंक के साथ मर्जर से पहले HDFC लिमिटेड के वाइस-चेयरमैन थे) ने एनालिस्ट को बताया कि HDFC बैंक में कोई अंदरूनी झगड़ा नहीं था और बोर्ड ने गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को लेकर कोई चर्चा नहीं की थी।
उन्होंने कहा कि डायरेक्टर्स एक ही पेज पर थे और मीटिंग्स के दौरान राय में कोई बड़ा अंतर नहीं देखा गया। चक्रवर्ती से क्लैरिटी मांगने के सवाल पर, उन्होंने इशारा किया कि अगले कदम तय करने के लिए बोर्ड जल्द ही मीटिंग करेगा।
लगभग उसी समय, RBI ने कहा कि उसे बैंक के काम या गवर्नेंस से जुड़ी कोई बड़ी दिक्कत नहीं मिली है। रेगुलेटर ने कहा कि वह आने वाले दिनों में बैंक के बोर्ड और मैनेजमेंट के संपर्क में रहेगा।
जारी है जांच
रॉयटर्स तुरंत रिपोर्ट को वेरिफाई नहीं कर सका, लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं। HDFC बैंक ने मंगलवार को घोषणा की कि उसके बोर्ड ने चक्रवर्ती के इस्तीफे के लेटर के कंटेंट की जांच के लिए भारतीय और इंटरनेशनल दोनों लॉ फर्मों को बुलाया है।
बैंक ने अपनी फाइलिंग में कहा, “बैंक के मजबूत गवर्नेंस स्टैंडर्ड को मजबूत करने के लिए, 23 मार्च, 2026 को हुई अपनी मीटिंग में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने चक्रवर्ती के इस्तीफे के लेटर के बारे में रिव्यू करने के लिए बाहरी लॉ फर्मों (घरेलू और इंटरनेशनल) को नियुक्त करने की मंजूरी दी।”
सेबी ने पहले ही अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे का रिव्यू शुरू कर दिया है, ताकि यह जांचा जा सके कि लिस्टेड कंपनियों के डायरेक्टर्स पर लागू होने वाले नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं।
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