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HDFC बैंक के सीईओ आदित्य पुरी ने बॉस से कहा था, जितना कहेंगे उतना होगा मुनाफा, हर दिन फोन करना बंद करें

आदित्य पुरी ने एचडीएफसी बैंक जॉइन करने का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा था, 'आपको मुझे फ्री हैंड देना होगा।' आदित्य पुरी की यह वही शर्त थी, जो उन्होंने सिटीबैंक में कामकाज के दौरान रखी थी।

अक्टूबर में रिटायर होने वाले एचडीएफसी बैंक के सीईओ आदित्य पुरी

देश के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले बैंकर HDFC बैंक के एमडी और सीईओ आदित्य पुरी ने अपने शेयरों को बेचकर 843 करोड़ रुपये की रकम हासिल की है। आदित्य पुरी ने बैंक में अपने 95 फीसदी शेयरों को बेच दिया है। उन्होंने 21 से 24 जुलाई के बीच अपने 74.2 लाख शेयरों को बेचा है। बैंक की कुल इक्विटी कैपिटल में 77.96 लाख शेयरों के साथ आदित्य पुरी की 0.14 फीसदी की हिस्सेदारी थी। एचडीएफसी बैंक के शेयरों में इस साल 24 मार्च के बाद से अब तक 46 फीसदी का उछाल आया है। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में 18.92 लाख करोड़ रुपये का सैलरी पैकेज हासिल करने वाले आदित्य पुरी को एचडीएफसी बैंक को खड़ा करने वाले लोगों में शुमार किया जाता है। बीते ढाई दशक से ज्यादा का वक्त उन्होंने एचडीएफसी बैंक को दिया है और उसे एक मुनाफे वाले और कम एनपीए वाले बैंक के तौर पर स्थापित किया है। आइए जानते हैं, आदित्य पुरी के करियर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें…

अपनी शर्तों पर पसंद है काम: आदित्य पुरी को अपनी शर्तों पर काम करने के लिए जाना जाता है। बेस्ट परफॉर्मेंस, अनुशासन में काम और नियमों के आधार पर बैंकिंग उनका मूलमंत्र रहा है। बैंकिंग सेक्टर में उन्होंने अपनी पहली नौकरी सिटीबैंक में की थी। उस दौर में सिटीबैंक का भारत का कारोबार संभालने वाले नानू पमनानी बताते हैं कि उनके दौर में आदित्य पुरी बैंक का दिल्ली का कामकाज देखते थे। पमनानी को एक सख्त बॉस के तौर पर जाना जाता था और वह अकसर सहकर्मियों को फोन कॉल्स करते रहते थे। पमनानी खुद बताते हैं कि एक बार इस आदत से तंग आकर आदित्य पुरी ने उनसे कहा था, ‘आपका कितना प्रॉफिट चाहते हैं। यदि मैं आपको 50 पर्सेंट ज्यादा मुनाफा दूं?’ पमनानी इस प्रस्ताव से काफी खुश थे, लेकिन आदित्य पुरी ने इसके आगे एक शर्त पर भी रखी, ‘आपको हर दिन मुझे फोन करना बंद करना होगा।’

HDFC चेयरमैन से कहा था, फ्रीहैंड देना होगा: कहा जाता है कि उनकी यह स्टाइल एचडीएफसी जॉइन करने पर भी बरकरार रही। 1992 में आदित्य पुरी को सिटीबैंक की ओर से मलयेशिया भेज दिया गया था। वहीं से वह एचडीएफसी जॉइन करने के लिए आए थे। एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख ने उन्हें बुलाया था। आदित्य पुरी ने एचडीएफसी बैंक जॉइन करने का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा था, ‘आपको मुझे फ्री हैंड देना होगा।’ आदित्य पुरी की यह वही शर्त थी, जो उन्होंने सिटीबैंक में कामकाज के दौरान रखी थी। पारेख ने उन्हें फ्री हैंड दिया और ढाई दशकों में आदित्य पुरी ने एचडीएफसी बैंक को देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक के तौर पर स्थापित किया है।

पिता नहीं चाहते थे बैंकिंग में जाएं आदित्य पुरी: एक और दिलचस्प बात यह है कि एचडीएफसी को इस मुकाम तक लाने वाले आदित्य पुरी के पिता उन्हें इस फील्ड में नहीं देखना चाहते थे। एयरफोर्स के अधिकारी रहे आदित्य पुरी के पिता बेटे को साइंस पढ़ाना चाहते थे। लेकिन पुरी ने कॉमर्स की दिशा पकड़ी वह कहते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें उनके दादा की एक बात ने प्रभावित किया था कि आपको यह जानने की जरूरत है कि वास्तव में जिंदगी से आप चाहते क्या हैं।

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