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‘भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, ब्रेक्जिट के झटकों से निपटने में सक्षम’

एसोचैम ने कहा, ‘भारत का ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में भारी कारपोरेट निवेश है। ऐसे में ब्रिटेन में विनिर्माण तथा अन्य सुविधाएं रखने वाली भारतीय कंपनियों को अपनी कारोबारी योजना में बदलाव करना होगा।'

Author नई दिल्ली | June 24, 2016 5:36 PM
कोलकाता में शेयर ब्रोकर सामने स्क्रीन पर बाजार की स्थिति को देखते हुए। (PTI Photo)

भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद काफी मजबूत है और इस वजह से यह ब्रेक्जिट के झटकों से निपटने में सक्षम है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में मतदान करने के बाद भारतीय उद्योग जगत ने यह राय व्यक्त की है। उद्योग का कहना है कि ब्रिटेन में निवेश करने वाली कंपनियों को हालांकि अपनी रणनीतियों को नए सिरे से बनाना होगा, जिससे कि वे इसके नकारात्मक प्रभाव से उबर सकें।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और यह ब्रेक्जिट की वजह से पैदा होने वाले लघु अवधि प्रभावों से निपटने में सक्षम है। एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने 43 साल बाद यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में मतदान किया।

उद्योग मंडल एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा, ‘भारत का ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में भारी कारपोरेट निवेश है। ऐसे में ब्रिटेन में विनिर्माण तथा अन्य सुविधाएं रखने वाली भारतीय कंपनियों को अपनी कारोबारी योजना में बदलाव करना होगा।’ सीआईआई के अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के फैसले के मद्देनजर भारतीय कंपनियों को अपनी रणनीति नई सिरे से बनानी होगी। हालांकि, यह कोई मुद्दा नहीं है। यदि हम मध्यम से दीर्घावधि के परिदृश्य के हिसाब से देखें तो ब्रेक्जिट से भारत पर असर नहीं होगा।

हालांकि, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि यूरोप और ब्रिटेन में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों और ऐसी फर्मों जिनकी वहां उत्पादन इकाइयां हैं इस फैसले से बुरी तरह प्रभावित होंगी। रावत ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत को अपनी घरेलू मजबूती के लिए मसलन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करना चाहिए जिससे वह वैश्विक कोषों के लिए सबसे विश्वसनीय गंतव्य बना रहे।

पीएचडी चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने कहा कि वित्त और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव कुछ समय के लिए है और भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद की वजह से इस झटके को झेलने में समक्ष है। सिन्हा ने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से ब्रेक्जिट का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का प्रभाव है। ब्रेक्जिट से जहां पहले से झटके खा रही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी और बढ़ेगी वहीं इससे वैश्विक स्तर पर जिंस के दाम नीचे आएंगे। भारत को शुद्ध जिंस आयातक के रूप में इससे फायदा होगा।

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