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फेडरल रिज़र्व असर: मूडीज़ ने कहा, उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों को होगा लाभ

मूडीज इनवेस्टर सर्विसेज ने रिपोर्ट में कहा है, ‘फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाये जाने से उन देशों पर नकारात्मक प्रभाव होगा जिन्हें बड़े पैमाने पर विदेशों से वित्त पोषण की जरूरत है।'
Author नई दिल्ली | December 15, 2016 13:48 pm
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज (रॉयटर्स फाइल फोटो)

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर में वृद्धि मजबूत होती अमेरिकी अर्थव्यवस्था को व्यक्त करता है और इससे उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों को लाभ होगा लेकिन साथ ही पूंजी निकासी से उनकी स्थिति नाजुक हो सकती है। मूडीज इनवेस्टर सर्विसेज ने गुरुवार (15 दिसंबर) को यह कहा। मूडीज इनवेस्टर सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाये जाने से सीमा पार पूंजी बहिर्प्रवाह बढ़ेगा और इसका उन देशों पर नकारात्मक प्रभाव होगा जिन्हें बड़े पैमाने पर विदेशों से वित्त पोषण की जरूरत है, अधिक कर्ज है, वृहत आर्थिक असामानता या राजनीति तथा नीतियों में अनिश्चितता है।’ ब्याज दर में वृद्धि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती को प्रतिबिंबित करता है और इसे 2018 तक जारी रहना चाहिए। अगर अमेरिकी वृद्धि से आयात की मांग बढ़ती है तो उभरते बाजारों के निर्यातकों को लाभ होगा।

मूडीज का मानना है कि फेडरल रिजर्व धीरे-धीरे ब्याज दर में वृद्धि करेगा। दो से तीन बार वृद्धि से फेडरल रिजर्व की ब्याज दर 2017 के अंत तक करीब 1.25 से 1.50 प्रतिशत हो जाएगी।’ मूडीज की उपाध्यक्ष तथा वरिष्ठ विश्लेषक माधवी बोकिल ने कहा, ‘फेडरल रिजर्व की ऊंची ब्याज दर से अमेरिका के मुकाबले उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव ज्यादा दिखेगा।’ अगर अमेरिकी वृद्धि से आयात के लिये मांग बढ़ती है तो उभरते बाजारों को फायदा हो सकता है लेकिन अगर इससे वित्तीय संपत्तियों की कीमत का पुनर्निर्धारण होता है तथा वैश्विक वित्तीय स्थिति कड़ी होती है तो इससे उन्हें नुकसान भी हो सकता है। मूडीज के अनुसार, ‘उन अर्थव्यवस्थाओं में इसका ज्यादा प्रभाव होगा जिनकी विदेशी मुद्रा कमाई और भंडार के मुकाबले विदेशों से वित्त की जरूरतें अधिक हैं।’

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