भारत की ऊर्जा जरूरतों, विदेश व्यापार और पश्चिम एशिया में रणनीतिक हितों की बात हो तो GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) का नाम प्रमुखता से सामने आता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, GCC देशों का समूह भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसी वजह से हाल के वर्षों में भारत और GCC के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि GCC क्या है, इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं और भारत के लिए इसकी अहमियत इतनी ज्यादा क्यों है…
क्या है GCC?
GCC यानी Gulf Cooperation Council (खाड़ी सहयोग परिषद) खाड़ी क्षेत्र के छह देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संगठन है। इसकी स्थापना 25 मई 1981 को की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
GCC के छह सदस्य देश हैं:
– सऊदी अरब (Saudi Arabia)
– संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates – UAE)
– कतर (Qatar)
– कुवैत (Kuwait)
– बहरीन (Bahrain)
– ओमान (Oman)
GCC का मुख्यालय Riyadh में स्थित है। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है GCC?
भारत का बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार
भारत और GCC देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारतीय दूतावास, रियाद और PIB के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा।
ऊर्जा
GCC देशों में दुनिया के बड़े तेल और गैस उत्पादक देश शामिल हैं। भारत अपनी कच्चे तेल और LNG की जरूरतों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे देशों से पूरा करता है। इसलिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए GCC के साथ मजबूत संबंध बेहद अहम हैं।
करीब 1 करोड़ भारतीयों का घर
GCC देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। भारतीय दूतावास, रियाद के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में GCC देशों में रहने वाले भारतीयों ने भारत को 52.44 अरब डॉलर की रेमिटेंस भेजी, जो भारत को मिलने वाली कुल रेमिटेंस का लगभग 38% है।
निवेश और रणनीतिक साझेदारी
GCC भारत में निवेश का भी एक बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। सितंबर 2025 तक GCC देशों से भारत में 31 अरब डॉलर से अधिक का संचयी निवेश आ चुका था।
भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्यों चर्चा में है?
भारत और GCC के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इसलिए चर्चा में है क्योंकि दोनों पक्षों ने 24 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से FTA वार्ता शुरू करने की घोषणा की थी। इससे पहले 5 फरवरी 2026 को वार्ता के लिए Terms of Reference (ToR) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे समझौते की दिशा में आगे का रोडमैप तय हुआ।
भारत सरकार के अनुसार, प्रस्तावित FTA का उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा दोनों पक्षों के आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है।
यह भी पढ़ें: जब दुनिया में कच्चा तेल सस्ता था, तब भारत में पेट्रोल-डीजल कितने में बिक रहा था?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
