देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा व प्रदूषण कम करने के अहम उपाय के रूप में देख रही है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन और एथेनॉल ब्लेंडिंग दोनों पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है।
लेकिन आखिर एथेनॉल क्या होता है, इसे किन फसलों से बनाया जाता है। आइए समझते हैं…
क्या है एथेनॉल?
एथेनॉल (Ethanol) एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जो कृषि उत्पादों में मौजूद शर्करा और स्टार्च से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है। E20 ईंधन में 20% एथनॉल और 80% पेट्रोल होता है। देश में इसे गन्ने, मोलासेस, चावल और अन्य खाद्यान्नों से तैयार किया जाता है।
कैसे बनता है एथेनॉल?
कच्चा माल
सबसे पहले मक्का, गन्ने का रस, शीरा या अन्य स्टार्चयुक्त फसल को एथेनॉल प्लांट में लाया जाता है। अगर मक्के का इस्तेमाल कर रहे है तो उसे बारीक पीसकर आटे जैसी अवस्था में बदल दिया जाता है।
स्लरी बनाना
पिसे हुए मक्के या अन्य कच्चे माल को पानी के साथ मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे स्लरी कहा जाता है। इसके बाद तापमान और pH को नियंत्रित किया जाता है।
स्टार्च को शर्करा में बदलना
मैश में विशेष एंजाइम मिलाए जाते हैं। ये एंजाइम मक्के या अन्य फसलों में मौजूद स्टार्च को पहले जटिल शर्करा और फिर सरल शर्करा में बदल देते हैं।
किण्वन (Fermentation)
इसके बाद मिश्रण को ठंडा करके बड़े टैंकों में भेजा जाता है। यहां यीस्ट (खमीर) मिलाया जाता है। यीस्ट शर्करा को खाकर उसे एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में बदल देता है।
आमतौर पर यह प्रोसेस 40 से 80 घंटे तक चलती है। किण्वन पूरा होने पर मिश्रण में लगभग 17-18% एथनॉल होता है।
आसवन (Distillation)
किण्वित मिश्रण को डिस्टिलेशन कॉलम में भेजा जाता है। यहां गर्मी देकर एथेनॉल को अन्य तरल और ठोस पदार्थों से अलग किया जाता है। एथेनॉल वाष्प (Vapor) के रूप में ऊपर उठता है और अलग कर लिया जाता है।
शुद्धिकरण (Purification)
डिस्टिलेशन के बाद एथेनॉल की शुद्धता लगभग 95% तक पहुंच जाती है। इसके बाद इसे मॉलेक्यूलर सिव (Molecular Sieve) जैसी तकनीक से और शुद्ध किया जाता है, जिससे पानी की बची हुई मात्रा भी निकल जाती है।
अंतिम उत्पाद और भंडारण
शुद्धिकरण के बाद करीब 99% शुद्ध एथेनॉल प्राप्त होता है। इसे बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर, रेल या जहाज के जरिए आपूर्ति की जाती है।

भारत में कितना हो रहा एथेनॉल उत्पादन?
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो गई।
क्या होता है एथेनॉल ब्लेंडिंग?
एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) का मतलब पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना है। एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जो गन्ने के रस, मोलासेस (शीरा), मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में निश्चित अनुपात में मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है।
उदाहरण के लिए:
E10 = 90% पेट्रोल + 10% एथेनॉल
E20 = 80% पेट्रोल + 20% एथेनॉल
एथेनॉल ब्लेंडिंग में भारत कितना आगे पहुंचा?
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंच चुका है। एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2025-26 में नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर 20% दर्ज किया गया।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
