किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।
आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…
क्या होता है बॉन्ड मार्केट?
बॉन्ड मार्केट वह वित्तीय बाजार है, जहां सरकारें और कंपनियां बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं। अगर हम आसान शब्दों में कहें तो बॉन्ड एक तरह का उधार लेने का लिखित समझौता होता है।
जब कोई निवेशक बॉन्ड खरीदता है, तो वह जारीकर्ता (सरकार या कंपनी) को एक निश्चित अवधि के लिए पैसा उधार देता है। बदले में जारीकर्ता तय समय तक निवेशक को ब्याज देता है और अवधि पूरी होने पर मूल रकम लौटा देता है।
बड़ी कंपनियां बैंक से लोन लेने के बजाय बॉन्ड क्यों जारी करती हैं?
हर स्थिति में बॉन्ड बैंक लोन से बेहतर नहीं होते, लेकिन कई मामलों में कंपनियां बॉन्ड को प्राथमिकता देती हैं।
– एक साथ बड़ी रकम जुटाने का विकल्प
– कर्ज के स्रोत में विविधता
– ब्याज दर का फायदा
– लंबी अवधि के लिए फंड
कैसे काम करता है बॉन्ड मार्केट?
मान लीजिए किसी कंपनी को 5,000 करोड़ रुपये जुटाने हैं। इसके लिए वह बॉन्ड जारी करती है, जिन्हें निवेशक खरीदते हैं। इससे कंपनी को जरूरी पूंजी मिल जाती है। बदले में कंपनी तय अवधि तक निवेशकों को नियमित ब्याज देती है।
मैच्योरिटी पूरी होने पर मूल राशि लौटा दी जाती है। अगर बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड है, तो निवेशक उसे मैच्योरिटी से पहले भी खरीद या बेच सकते हैं।
बैंक लोन और बॉन्ड में क्या अंतर है?
| बैंक लोन | बॉन्ड |
|---|---|
| बैंक से कर्ज लिया जाता है | निवेशकों से पैसा जुटाया जाता है |
| बैंक कर्जदाता होता है | बॉन्ड खरीदने वाले निवेशक कर्जदाता होते हैं |
| शर्तें बैंक तय करता है | शर्तें बॉन्ड दस्तावेज में तय होती हैं |
| आमतौर पर एक या कुछ बैंक शामिल होते हैं | बड़ी संख्या में निवेशक हिस्सा ले सकते हैं |
कौन जारी कर सकता है बॉन्ड?
भारत में कई तरह की संस्थाएं बॉन्ड जारी कर सकती हैं, जैसे-
- – केंद्र सरकार
– राज्य सरकारें
– निजी कंपनियां आदि।
इन बॉन्ड के निर्गम और लिस्टिंग से जुड़े नियम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) तय करता है।
कौन खरीद सकता है बॉन्ड?
बॉन्ड में निवेश करने वालों में शामिल हो सकते हैं –
– म्यूचुअल फंड
– बीमा कंपनियां
– पेंशन फंड
– खुदरा निवेशक (कुछ मामलों में) आदि।
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आपने कभी Zepto, Instamart या Blinkit से 10-15 मिनट में दूध, ब्रेड या किराने का सामान मंगाया है, तो आपके मन में भी सवाल जरूर आया होगा कि इतनी तेज डिलीवरी देने वाली कंपनियां आखिर कमाई कैसे करती हैं? ये कंपनियां कई बार भारी डिस्काउंट भी देती हैं, ऐसे में लगता है कि इन्हें फायदा कैसे होता होगा।
असल में क्विक कॉमर्स का बिजनेस मॉडल सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनियों की कमाई कई अलग-अलग स्रोतों से होती है। आइए जानते हैं इसके बारे में…
[डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे निवेश की सलाह न मानें। किसी भी बॉन्ड में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।]
