भारत ने चीन, जापान और रूस से आयात होने वाले कुछ स्टील उत्पादों की कीमतों की जांच शुरू कर दी है। घरेलू स्टील कंपनियों का आरोप है कि इन देशों से स्टील भारत में बहुत कम कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे भारतीय उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है। इसी शिकायत के बाद वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने एंटी-डंपिंग जांच (Anti-Dumping Investigation) शुरू की है।

ऐसे में सवाल उठता है कि एंटी-डंपिंग जांच क्या होती है? सरकार यह जांच कब और क्यों शुरू करती है? अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आगे क्या होता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं…

क्या है एंटी-डंपिंग?

विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, जब कोई देश किसी उत्पाद को दूसरे देश में उसकी सामान्य कीमत से कम कीमत पर बेचता है और इससे आयात करने वाले देश के घरेलू उद्योग को नुकसान होता है, तो इसे डंपिंग कहा जाता है। ऐसे मामलों की जांच को एंटी-डंपिंग जांच कहा जाता है।

भारत में यह जांच कौन करता है?

भारत में एंटी-डंपिंग मामलों की जांच डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) करता है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है। DGTR यह जांच करता है कि क्या उत्पाद वास्तव में Dumped Price पर आयात किया जा रहा है? , क्या इससे भारतीय उद्योग को Material Injury (वास्तविक नुकसान) हुआ है? क्या दोनों के बीच सीधा संबंध है?

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आगे क्या होता है?

यदि जांच में ये बातें सही पाई जाती हैं, तो डीजीटीआर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश कर सकता है।

भारत ने क्यों शुरू की स्टील की जांच?

Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेडरल ट्रेड मिनिस्ट्री के तहत आने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज ने गुरुवार को एक नोटिफिकेशन में कहा कि घरेलू प्रोड्यूसर JSW स्टील, JSW विजयनगर मेटालिक्स लिमिटेड और जिंदल स्टील ओडिशा ने जांच की रिक्वेस्ट की थी।

कंपनियों ने कहा कि चीन, रूस और जापान से डंप्ड कीमतों पर इंपोर्ट घरेलू इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचा रहा है और शायद आगे भी नुकसान पहुंचाता रहेगा।

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जांच में 25mm तक मोटाई वाले एलॉय या नॉन-एलॉय स्टील के हॉट रोल्ड फ्लैट प्रोडक्ट शामिल हैं।

क्या एंटी-डंपिंग ड्यूटी आयात पर प्रतिबंध है?

नहीं। एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य आयात पर रोक लगाना नहीं, बल्कि अनुचित रूप से कम कीमत पर होने वाले आयात से घरेलू उद्योग की रक्षा करना और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

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