आज के दौर में स्टार्टअप्स के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग जुटाना कोई नई बात नहीं रह गई है। अक्सर खबरों में सुनने को मिलता है कि किसी कंपनी ने वीसी फंड (VC Fund) से निवेश हासिल किया और देखते ही देखते उसका कारोबार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
लेकिन आखिर ये वेंचर कैपिटल फंड (Venture Capital Fund) क्या होता है, जो नए और उभरते स्टार्टअप्स पर इतना बड़ा दांव लगाता है? और यह तय कैसे करता है कि किस कंपनी में पैसा लगाना है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं…
क्या होता है Venture Capital Fund?
एक ऐसा निवेश फंड होता है, जो शुरुआती या तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप्स और नई कंपनियों में निवेश करता है। उसे वेंचर कैपिटल फंड या वीसी फंड कहा जाता है।
आमतौर पर शुरुआती या तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप्स के पास कोई लंबा बिजनेस रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए उन्हें बैंक से आसानी से लोन नहीं मिल पाता। ऐसे में वेंचर कैपिटल फंड इन कंपनियों में पैसा निवेश करता है और बदले में कंपनी में हिस्सेदारी लेता है।
वीसी फंड कहां से लाता है पैसा?
यह फंड खुद पैसा नहीं लगाता है। बल्कि बड़े निवेशकों, कंपनियों, बैंकों, बीमा कंपनियों और अमीर निवेशकों से पैसा जुटाता है। इन निवेशकों को लिमिटेड पार्टनर्स कहा जाता है, जबकि फंड का संचालन करने वालों को जनरल पार्टनर्स कहा जाता है।
कैसे मिलती है स्टार्टअप्स को फंडिंग?
जब कोई स्टार्टअप नया प्रोडक्ट या बिजनेस मॉडल लेकर आता है, तो वीसी फंड उसकी संभावनाओं का आकलन करता है।
अगर फंड को लगता है कि कंपनी भविष्य में तेजी से बढ़ सकती है, तो वह उसमें निवेश करता है। निवेश के बदले वीसी फंड कंपनी के कुछ शेयर अपने पास रखता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी स्टार्टअप की वैल्यू 10 करोड़ रुपये आंकी जाती है और वीसी फंड उसमें 1 करोड़ रुपये निवेश करता है, तो उसे कंपनी में लगभग 10% हिस्सेदारी मिल सकती है।
वीसी फंड और बैंक लोन में क्या अंतर है?
| वीसी फंड | बैंक लोन |
| निवेश के बदले कंपनी में हिस्सेदारी (Equity) लेता है | ब्याज के साथ पैसा वापस लेना होता है |
| कंपनी के मुनाफे और नुकसान के जोखिम में भागीदार बनता है | जोखिम मुख्य रूप से उधार लेने वाले पर होता है |
| रिटर्न कंपनी की सफलता और वैल्यू बढ़ने पर निर्भर करता है | बैंक को तय ब्याज और मूलधन वापस मिलता है |
| शुरुआती स्टार्टअप्स में भी निवेश कर सकता है | आमतौर पर मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड वालों को लोन मिलता है |
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
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