देश में CNG और PNG का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सरकार भी अधिक से अधिक शहरों और कस्बों तक प्राकृतिक गैस पहुंचाने पर जोर दे रही है। इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) Network का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क क्या होता है और आखिर CNG व PNG आपके शहर तक कैसे पहुंचती है?

क्या है सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन?

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क जमीन के नीचे बिछी नैचुरल गैस पाइपलाइनों का एक आपस में जुड़ा हुआ सिस्टम है, जिसके जरिए घरेलू, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों को पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) और कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (CNG) की सप्लाई की जाती है।

CGD नेटवर्क का इस्तेमाल किसी खास शहर या जिले में मौजूद रिटेल आउटलेट्स तक नैचुरल गैस पहुंचाने के लिए भी किया जाता है, जहां गाड़ियों में भरने से पहले इसे कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (CNG) के रूप में और ज्यादा कंप्रेस किया जाता है।

किसके पास होता है CGD Network का जिम्मा?

भारत में CGD Network का जिम्मा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के पास है। यह बोर्ड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के तहत बनाया गया है।

PNGRB अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों के लिए कंपनियों का चयन करता है और उन्हें CGD Network विकसित करने की अनुमति देता है। साथ ही नेटवर्क के संचालन, सुरक्षा और सेवा से जुड़े नियम भी तय करता है।

क्या है पीएनजी?

इसे पाइप के जरिए होटलों और घरों में पहुंचाया जाता है। इसमें पाइपलाइन में मीथेन गैस भरी होती है। इसके लिए किसी सिलेंडर की भी जरूरत नहीं होती है।

क्या है सीएनजी?

सीएनजी भी नेचुरल गैस है। इसे भी सिलेंडर में ही कंप्रेस करके भरा जाता है। हालांकि सीएनजी का इस्तेमाल गाड़ियों के फ्यूल के लिए होता है।

आपके शहर तक कैसे पहुंचती है CNG और PNG?

PNGRB के नियमों के तहत जिस कंपनी को किसी क्षेत्र का अधिकार मिलता है, वह वहां गैस वितरण का नेटवर्क तैयार करती है। इसी नेटवर्क के माध्यम से CNG स्टेशनों तक प्राकृतिक गैस पहुंचाई जाती है और घरों व अन्य उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन दिए जाते हैं। नेटवर्क के निर्माण और संचालन के लिए PNGRB ने तकनीकी और सुरक्षा मानक भी तय किए हैं।

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केंद्र सरकार ने हाल ही में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स और ब्याज आय पर कर को खत्म करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।

इसके बाद Government Securities (G-Sec) एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। लेकिन आखिर Government Securities क्या होती हैं और सरकार इनके जरिए पैसा कैसे जुटाती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं…