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विश्व आर्थिक मंच: IMF प्रमुख लेगार्ड बोलीं- अत्यधिक असमानता की समस्या से निपटने को कोई ‘जादू की छड़ी’ नहीं

ईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने यह पूछे जाने पर कि क्या मध्यम वर्ग संकट में है, कहा, ‘हां और अभी। अर्थशास्त्री यही कहेंगे।’

Author दावोस | January 18, 2017 6:18 PM
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड। (AP File Photo)

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने बुधवार (18 जनवरी) को कहा कि नीतिनिर्माताओं को असमानता पर अंकुश के लिए अब कार्रवाई करने की जरूरत है। हालांकि, लेगार्ड ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में बढ़ती असमानता पर छिड़ी बहस के बीच कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कोई ‘जादू की छड़ी’ नहीं है। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि वैश्वीकरण की ओर लौटना सही रवैया नहीं होगा। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने यह पूछे जाने पर कि क्या मध्यम वर्ग संकट में है, कहा, ‘हां और अभी। अर्थशास्त्री यही कहेंगे।’ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह संकट है। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग बढ़ रहा है और संकूचित भी हो रहा है। वैश्विक आधार पर यह बढ़ रहा है लेकिन अमेरिका जैसे देशों में यह घट रहा है। लेगार्ड ने कहा कि यदि अत्यधिक असमानता की स्थिति होगी तो सतत वृद्धि हासिल कर पाना काफी मुश्किल होगा। लेगार्ड ने कहा कि 2013 मेंं दावोस में पूर्ण सत्र में जब उन्होंने पहली बार असमानता की बात की थी तो उनके संस्थान सहित कई अन्य अर्थशास्त्रियों ने इसका विरोध किया था।

आईएमएफ प्रमुख ने कहा, ‘यदि नीतिनिर्माता नहीं सुनते हैं तो मैं नहीं कह सकती कि क्या किया जा सकता है। अत्यधिक असमानता को समाप्त करने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतिनिर्माताओं को मतदाताओं की बात सुननी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से वैश्वीकरण प्रभावित होगा, उन्होंने कहा कि हमें इस बारे में काफी कम सूचना है कि उनकी क्या योजना है। वह डब्ल्यूईएफ के वार्षिक सम्मेलन में मध्यम वर्ग के संकट के हल पर सत्र को संबोधित कर रही थीं। इसी सत्र को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं हार्वर्ड के प्रोफेसर लैरी समर्स ने कहा कि अमीर मानते हैं कि उन्हें अपनी देखभाल करने की जरूरत है, वहीं गरीबों का मानना है कि उनकी बात सुनी नहीं जाती।

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