भारत अमेरिका द्वारा दी गई छूट समाप्त होने के बावजूद रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। तेल मंत्रालय ने साफ कहा है कि कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह व्यावसायिक फैसलों के आधार पर की जाती है।
रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगी कि हम पहले भी रूस से खरीद रहे थे… मेरा मतलब है छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी।”
उन्होंने कहा, “खरीदारी के लिए मूल रूप से व्यावसायिक दृष्टिकोण ही आधार होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि भारत ने कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है और छूट नीतियों में बदलाव से किसी प्रकार की बाधा की आशंका नहीं है।
कच्चे तेल की कोई कमी नहीं
शर्मा ने कहा, “कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त कच्चे तेल की बार-बार व्यवस्था की जा चुकी है…और छूट हो या न हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा,”
पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण वैश्विक ऊर्जा व्यापार में आए व्यवधान के बाद भारत रियायती रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा, जबकि नई दिल्ली लगातार यह तर्क देती रही है कि सस्ती ऊर्जा तक पहुंच एक प्राथमिकता बनी हुई है।
मार्च के मध्य में अमेरिका ने भारत और अन्य देशों को समुद्र में मौजूद प्रतिबंधित रूसी तेल और पेट्रोलयम उत्पाद खरीदने की अनुमति 30 दिन के लिए दी थी। बाद में इस छूट कोबढ़ाकर 16 मई तक कर दिया गया था। अब यह समयसीमा समाप्त हो चुकी है।
OMCs का नुकसान कम होकर 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन हुआ
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारतीय पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अपने नुकसान को कम करके 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर लाने में कामयाब रही हैं, जो पहले 1000 करोड़ रुपये प्रतिदिन था। यह कमी पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच आई है, जिसने कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट के कारण तेल कंपनियों पर दबाव डाला हुआ है।
यह घटनाक्रम पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद सामने आया है। मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतें भी 2 रुपये बढ़ाई गई थीं।
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