अगर कोई निवेशक 60 साल की बजाय 50 साल की उम्र में रिटायर होना चाहता है, तो उसके लिए केवल नियमित निवेश ही नहीं बल्कि हर वर्ष निवेश की राशि बढ़ाना भी बेहद अहम हो जाता है। यहीं पर स्टेप-अप SIP की रणनीति काम आती है।
स्टेप-अप SIP कैलकुलेटर यह समझने में मदद करता है कि फिक्स्ड SIP और हर वर्ष बढ़ने वाली SIP के बीच लंबे समय में कितना बड़ा फर्क आ सकता है।
60 की उम्र में रिटायरमेंट
व्यक्ति 30 की उम्र में निवेश शुरू करता है और उसका लक्ष्य 60 की उम्र में यानी रिटायरमेंट पर 5 करोड़ रुपये का फंड बनाना है।
– SIP: 15000 महीना निवेश
– निवेश अवधि : 30 वर्ष
– अपेक्षित वार्षिक रिटर्न : 12%
– 30 वर्ष : 5,29,48,707 रुपये कुल निवेश
– कुल निवेशित राशि : 54,00,000 रुपये
– अनुमानित रिटर्न : 4,75,48,707 रुपये
50 की उम्र में रिटायरमेंट
व्यक्ति का लक्ष्य FIRE रिटायरमेंट विधि का पालन करना और 50 की उम्र में रिटायर होना है।
– निवेश की शुरुआत: 30 वर्ष की उम्र में
– निवेश अवधि: 20 वर्ष (50 वर्ष की उम्र तक)
– SIP: 16700 रुपये महीना
– अपेक्षित वार्षिक रिटर्न : 12%
– स्टेप-अप SIP: हर साल 15%
– 20 वर्ष : 5,05,27,687 रुपये कुल निवेश
– कुल निवेशित राशि : 2,05,29,732 रुपये
– अनुमानित रिटर्न : 2,99,97,955 रुपये
क्या है FIRE रिटायरमेंट विधि?
FIRE रिटायरमेंट विधि यानी वित्तीय स्वतंत्रता, जल्दी रिटायर होना है। पारंपरिक रिटायरमेंट उम्र 60 तक काम करने के बजाय, व्यक्ति का लक्ष्य पहले ही एक बड़ा फंड तैयार करना होता है। ताकि जल्दी रिटायर हो सकें।
हालांकि, चुनौती यह है कि पहले रिटायर होने का मतलब है कि समान रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कम कमाई वाले वर्ष होते हैं। यही वह जगह है जहां एक स्टेप-अप SIP का इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है।
FIRE रिटायरमेंट विधि में स्टेप अप SIP क्यों है जरूरी?
FIRE रिटायरमेंट विधि में समय कम होता है क्योंकि लक्ष्य जल्दी रिटायर होना होता है। जब निवेश अवधि 30 वर्षों से घटकर 20 वर्षों तक हो जाती है, तो केवल मंथली योगदान पर्याप्त नहीं हो सकता है जब तक कि समय के साथ SIP न बढ़े।
एक निश्चित SIP तब अच्छी तरह से काम करता है जब निवेश का क्षितिज लंबा होता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति 10 साल पहले वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहता है, तो योगदान पैटर्न को बदलने की जरुरत हो सकती है। एक स्टेप-अप SIP इस बदलाव को पकड़ता है जिससे बाद के सालों में बड़े निवेश की अनुमति मिलती है।
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सैलरी आते ही 50/30/20 के नियम को बजट बनाने का आसान और लोकप्रिय तरीका माना जाता है। यह नियम आपकी मंथली सैलरी को तीन हिस्सों में बांटकर खर्च और बचत को संतुलित करने में मदद करता है। इस नियम के अनुसार आपकी कमाई का 50% जरूरी खर्चों पर, 30% लाइफस्टाइल खर्चों पर और 20% बचत या निवेश के लिए रखा जाता है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
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