केंद्र सरकार ने चीन से जुड़े निवेश को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ (इंडिया) लिमिटेड और वीवो मोबाइल इंडिया (VMI) के जॉइंट वेंचर को मंजूरी दे दी है। यह कंपनी भारत में स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ का निर्माण करेगी।

बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) में दी गई जानकारी के अनुसार, डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ ने बताया कि वीवो मोबाइल इंडिया को 8 जुलाई 2026 को भारत सरकार से जॉइन्ट वेंचर (JV) बनाने और उसमें हिस्सेदारी लेने की मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तहत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी प्रेस नोट-3, 2020 के नियमों के अनुसार दी गई है।

निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य

प्रेस नोट-3 अप्रैल 2020 में केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया एक नियम है। इसके तहत भारत से जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था।

यह फैसला कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के सस्ते अधिग्रहण (टेकओवर) को रोकने के लिए लिया गया था। उसी साल गलवान घाटी में भारत-चीन तनाव बढ़ने के बाद सुरक्षा कारणों से भी यह नियम लागू रखा गया।

यह नियम मुख्य रूप से चीन से आने वाले निवेश को ध्यान में रखकर बनाया गया था। बांग्लादेश और पाकिस्तान से निवेश पहले ही सरकारी मंजूरी के जरिए संभव था जबकि नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान जैसे अन्य पड़ोसी देशों से भारत में विदेशी निवेश का हिस्सा बहुत कम है।

हालांकि, अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच भारत अब चीन के साथ आर्थिक रिश्तों में संतुलित रुख अपनाता नज़र आ रहा है।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ ने बताया कि यह जॉइंट वेंचर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, खासकर स्मार्टफोन के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) के तौर पर काम करेगा।

क्या काम करेगा डिक्सन-वीवो का जॉइंट वेंचर

डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ ने बताया कि यह संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज खासकर स्मार्टफोन के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) के तौर पर काम करेगा। इस नई कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ और 49 फीसदी हिस्सेदारी वीवो मोबाइल इंडिया की होगी।

इसी बीच केंद्र सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले 85 कैपिटल गुड्स और डिस्प्ले असेंबली व मोबाइल फोन की वायरलेस चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले इंडक्टर-कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में लगने वाले कच्चे माल पर लगने वाली सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को मार्च 2029 तक माफ कर दिया है।

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इन शुल्क छूटों का मकसद देश में डिस्प्ले असेंबली के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इन डिस्प्ले असेंबली का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, मेडिकल और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।

अधिकारी ने कहा कि मोबाइल फोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले इंडक्टर-कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में लगने वाले कच्चे माल पर आयात शुल्क में छूट से भारत में मोबाइल निर्माण के दौरान होने वाली वैल्यू एडिशन और बढ़ेगी।

डिक्सन-वीवो के जॉइंट वेंचर को मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब कुछ दिन पहले ही वित्त मंत्रालय ने भारत में फैक्ट्री लगाने वाली चार चीनी बिजली इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडरों में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।

इन चार कंपनियों – टीबीईए एनर्जी (TBEA Energy), नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया (Nanjing Electric India), न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया (New Northeast Electric India) और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) [Taikai Electric (India)] को सार्वजनिक खरीद (पब्लिक प्रोक्योरमेंट) नियमों के कुछ प्रावधानों से छूट दी गई है।

इन नियमों के तहत भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी खरीद, सेवाओं या निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडरों में बोली लगाने के लिए पहले संबंधित भारतीय प्राधिकरण के साथ पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होता है। अब इन चार कंपनियों को इस शर्त से राहत दे दी गई है।

सरकार के संशोधित निवेश नियमों के अनुसार, जिस कंपनी में निवेश किया जाएगा, उसमें बहुमत हिस्सेदारी (मेजॉरिटी शेयरहोल्डिंग) और नियंत्रण (कंट्रोल) हर समय भारतीय नागरिकों या भारतीय नागरिकों के स्वामित्व और नियंत्रण वाली भारतीय कंपनियों के पास ही रहेगा।

कैबिनेट के फैसले से जुड़े आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी निवेश होने के बावजूद संबंधित कंपनी का नियंत्रण भारतीय हाथों में बना रहे।