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भारत आने से बचने के लिए अब यह तरकीब अपना रहा विजय माल्या, जानें- कितने दिन टल सकता है प्रत्यर्पण

Vijay Mallya extradition to india: यदि माल्या की अपील खारिज होती है, तब भी उसके पास इस प्रक्रिया के जरिए अपने प्रत्यर्पण को कुछ महीने या फिर उससे भी ज्यादा वक्त के लिए टालने का मौका होगा।

भारत आने से बचने के लिए अब यह तरकीब अपना रहा विजय माल्या

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की ओर से भारत ने आने के लिए अब एक नया और आखिरी पैंतरा अपनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक ब्रिटेन में विजय माल्या और उसके वकीलों की टीम की ओर से अब शरण के लिए याचिका दायर करने की तैयारी की जा सकती है। यदि माल्या की ओर से प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया जाता है तो फिर शरण मांगी जा सकती है। यही नहीं कुछ सूत्रों के मुताबिक तो माल्या ने ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल के समक्ष शरण के लिए मांग की अर्जी भेज भी दी है।

अप्रैल में यूके हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है। इसके बाद 14 मई को कोर्ट ने माल्या को सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका देने से इनकार कर दिया था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शरण के लिए याचिका कब दायर की गई है। हालांकि यह बात साफ है कि माल्या ने ब्रिटेन की गृह मंत्री के दफ्तर में शरण के लिए आवेदन किया है।

ब्रिटेन के कानून के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक प्रत्यर्पण को टालने के लिए माल्या के पास दो तरीके हैं, जिनमें से एक शरण मांगना है। माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए दिसंबर, 2018 में ही लंदन की वेस्टमिन्सटर कोर्ट ने आदेश दिया था। उसके बाद विजय माल्या ने उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जो खारिज हो गया। इसके बाद अब विजय माल्या ने शरम मांगने का तरीका अपनाया है। जानकारों के मुताबिक शरण के लिए कई बार अपील की जा सकती है।

यदि माल्या की अपील खारिज होती है, तब भी उसके पास इस प्रक्रिया के जरिए अपने प्रत्यर्पण को कुछ महीने या फिर उससे भी ज्यादा वक्त के लिए टालने का मौका होगा। एक वकील ने बताया कि यदि माल्या की शरण की मांग गृह मंत्रालय की ओर से खारिज कर दी जाती है, तब उसके पास ट्राइब्यूनल में जाने का अधिकार होगा। ट्राइब्यूनल में एक नहीं बल्कि कई बार अपील दाखिल की जा सकती है। इस तरह विजय माल्या 18 महीने या फिर दो साल तक के लिए प्रत्यर्पण को टाल सकता है।

माल्या के पास एक और विकल्प यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जाने का होगा। यहां विजय माल्या की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि यदि वह भारत लौटा तो उसके साथ फेयर ट्रायल नहीं होगा। हालांकि यहां यदि भारतीय एजेंसियों की ओर से पर्याप्त तर्क और सबूत दिए जाते हैं तो फिर माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी मिल सकती है।

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